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तहसीलदार बोले जांच बाकी, पटवारी का दावा—रिपोर्ट जमा; 15 दिन बाद भी कार्रवाई पर सवाल!
कुड़ेकेला।ग्राम पंचायत नवापारा में मुक्तिधाम की शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और भवन व गोदाम निर्माण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के मुक्तिधाम के लिए निर्धारित जमीन पर कब्जा कर आलीशान भवन और गोदाम का निर्माण किया गया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत से लेकर तहसील कार्यालय और जिला कलेक्टर के जनसमस्या निवारण शिविर तक शिकायत की, लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
मामले में सबसे अधिक सवाल राजस्व विभाग की जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं!

एक तरफ छाल तहसीलदार जांच और अंतिम प्रतिवेदन बाकी होने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ संबंधित हलका पटवारी का दावा है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट तहसील कार्यालय में जमा कर चुके हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के इन अलग-अलग बयानों ने जांच की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तहसीलदार और पटवारी के बयानों में अंतर, आखिर किस रिपोर्ट का इंतजार?
नवापारा मुक्तिधाम की जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग की भूमिका पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब शासकीय भूमि पर कब्जे की शिकायत की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

इस बीच छाल तहसीलदार का कहना है कि मामले में धरातलीय जांच और अंतिम जांच प्रतिवेदन का आना अभी बाकी है। वहीं संबंधित पटवारी का दावा है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट तहसील कार्यालय में सौंप चुके हैं।

इन दोनों बयानों के सामने आने के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पटवारी अपनी रिपोर्ट जमा कर चुके हैं, तो तहसीलदार किस प्रतिवेदन का इंतजार कर रहे हैं? क्या पटवारी की रिपोर्ट के बाद उच्चस्तरीय परीक्षण या अतिरिक्त जांच की प्रक्रिया लंबित है, अथवा अंतिम प्रतिवेदन तैयार किया जाना बाकी है?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है। राजस्व विभाग को यह बताना चाहिए कि जांच किस स्तर पर है, रिपोर्ट कब प्राप्त हुई और आगे की कार्रवाई के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हालांकि, केवल बयानों में अंतर के आधार पर जानबूझकर फाइल दबाने या किसी को बचाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
मुक्तिधाम की जमीन पर भवन और गोदाम निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग!!

ग्रामीणों के अनुसार, मुक्तिधाम जैसी सार्वजनिक और धार्मिक महत्व वाली भूमि पर कथित कब्जे तथा भवन और गोदाम निर्माण को लेकर लंबे समय से आपत्ति जताई जा रही है। उनका कहना है कि मुक्तिधाम गांव की सामुदायिक जरूरत से जुड़ी भूमि है, इसलिए इसके उपयोग और संरक्षण को लेकर प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित भूमि के खसरा अभिलेख, राजस्व रिकॉर्ड, भूमि का वास्तविक सीमांकन और मौके पर हुए निर्माण की जांच कराई जाए। यदि जांच में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

मामले में भूमि का वास्तविक स्वामित्व, दर्ज उपयोग और निर्माण की वैधानिक स्थिति आधिकारिक राजस्व अभिलेखों तथा जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होना आवश्यक है। इन तथ्यों की पुष्टि के बाद ही प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय हो सकेगी।
पंचायत से कलेक्टोरेट तक शिकायत, 15 दिन बाद भी ग्रामीणों को इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले ग्राम पंचायत के समक्ष अपनी शिकायत रखी। इसके बाद तहसीलदार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। जब उन्हें अपेक्षित कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने जिला कलेक्टर के जनसमस्या निवारण शिविर में लिखित शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत दिए हुए 15 दिन से अधिक समय बीतने का दावा करते हुए ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उन्हें ऐसी किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है, जिससे मामले का समाधान होता दिखाई दे।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है, तो उसकी जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है? क्या मामले में स्थल निरीक्षण किया गया है? क्या संबंधित पक्षों को नोटिस जारी हुए हैं? और यदि जांच रिपोर्ट जमा हो चुकी है, तो उस पर आगे की कार्रवाई कब होगी?
इन सवालों पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने से मामले को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सकती है।

चौक-चौराहों पर चर्चा तेज, राजस्व विभाग की जवाबदेही पर सवाल,नवापारा मुक्तिधाम का मामला अब गांव में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़ी शिकायत पर जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
तहसीलदार और पटवारी के बयानों में सामने आए अंतर ने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग केवल जांच जारी होने की बात कहने तक सीमित न रहे, बल्कि जांच की प्रगति और आगे की कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी भी दे।शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही का अहम हिस्सा है।ऐसे में इस प्रकरण में राजस्व विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण है।
अब कलेक्टर के हस्तक्षेप पर टिकी निगाहें
नवापारा मुक्तिधाम अतिक्रमण विवाद में अब ग्रामीण जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए और जांच में अतिक्रमण प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि छाल राजस्व विभाग जांच प्रतिवेदन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति कब स्पष्ट करता है और जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब पटवारी रिपोर्ट जमा करने का दावा कर रहे हैं और तहसीलदार जांच प्रतिवेदन बाकी बता रहे हैं, तो नवापारा मुक्तिधाम मामले की वास्तविक स्थिति क्या है? इसका स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच ही ग्रामीणों की शंकाओं को दूर कर सकती है!
