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रायगढ़। जिले में अवैध रेत उत्खनन का कारोबार इन दिनों चरम पर है। मांड नदी के रानीगुड़ा, लेबड़ा, उसरौट और डूमरपाली जैसे घाटों से रेत माफिया खुलेआम रेत निकालकर बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित नजर आ रही है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
जानकारी के अनुसार, खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी की कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन यह कार्रवाई ज्यादातर छोटे वाहनों तक ही सीमित रह जाती है। रविवार को भी विभागीय टीम ने रानीगुड़ा और डूमरपाली घाट पर दबिश देते हुए पांच ट्रैक्टरों को जब्त किया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता निभाने जैसी है, क्योंकि असली बड़े खिलाड़ी अब भी पकड़ से बाहर हैं।

सैकड़ों ट्रैक्टरों से रोज हो रही ढुलाई
रानीगुड़ा और लेबड़ा क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत का अवैध उत्खनन कर उसे विभिन्न स्थानों पर डंप किया जा रहा है। इसके बाद 10 चक्का भारी वाहनों से इन डंप की गई रेत को शहर और अन्य जिलों में खपाया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क में बड़े रेत माफियाओं की भूमिका अहम बताई जा रही है।
बड़े माफियाओं पर कार्रवाई का अभाव
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, 10 चक्का वाहनों के मालिक ही इस अवैध कारोबार के मुख्य संचालक हैं, लेकिन अब तक इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग की कार्रवाई केवल छोटे ट्रैक्टर चालकों तक सीमित रहने से यह साफ संकेत मिलता है कि बड़े माफियाओं तक पहुंचने में या तो इच्छाशक्ति की कमी है या फिर कोई और वजह?
