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रायगढ़, 1 अगस्त। रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में लगभग तीन साल बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।

यह फैसला 31 जुलाई 2026 को सुनाया गया। पुलिस के अनुसार मामले की वैज्ञानिक विवेचना, मजबूत साक्ष्य और प्रभावी अभियोजन के चलते न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषसिद्ध माना।
पुरानी रंजिश बनी दोहरी हत्या की वजह
अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2023 की रात करीब 10:30 बजे ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश के चलते चारों आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे एवं अन्य कठोर हथियारों से हमला कर दिया। हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने अपराध छिपाने की नीयत से एक मृतक के शव को मुख्य सड़क तक घसीटकर घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच में पूरा घटनाक्रम सामने आ गया।

पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से जुटाए सबूत
घटना की सूचना मिलते ही तमनार पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर के नेतृत्व में जांच शुरू की। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया, आरोपियों से पूछताछ की गई तथा उनके मेमोरेण्डम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से भौतिक और तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए तथा गवाहों के बयान दर्ज किए।

एसडीओपी दीपक मिश्रा ने पूरी की अग्रिम विवेचना
एससी-एसटी एक्ट के तहत मामले की आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़ दीपक मिश्रा ने की। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के धारा-164 के तहत बयान दर्ज कराए, जाति संबंधी दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए, फरार आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर मजबूत अभियोग पत्र तैयार कराया और समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया।
22 गवाह और 101 साक्ष्यों ने मजबूत किया केस
राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने मामले की प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 22 गवाहों के बयान, 81 दस्तावेजी साक्ष्य तथा 20 भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
इन आरोपियों को मिली दो-दो उम्रकैद
हरिलाल उरांव (33 वर्ष), ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार
मुकेश पडिहारी (41 वर्ष), ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार
जितेन्द्र पटनायक उर्फ जीतू (34 वर्ष), ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार
गणेश पडिहारी (35 वर्ष), ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार
चारों आरोपियों को हत्या, साजिश और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराते हुए दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

एसएसपी ने कहा—हर गंभीर अपराध की हो वैज्ञानिक विवेचना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि जिले के सभी विवेचकों को गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक, निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि न्यायालय में मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को कठोर सजा दिलाई जा सके। उन्होंने समंस और वारंट की समयबद्ध तामिली सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया है। तमनार के इस चर्चित दोहरे हत्याकांड में भी पुलिस की सशक्त विवेचना और प्रभावी अभियोजन के कारण आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफलता मिली।
