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(रायगढ़)। सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर प्रशासन की जांच अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। कलेक्टर के निर्देश के बाद ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़े मामलों की पड़ताल शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में नगर निगम ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली ट्रस्ट की सभी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए पांच सदस्यीय सर्वे टीम गठित की है।

टीम को ट्रस्ट की करीब 295 संपत्तियों की नापजोख कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।सर्वे के दौरान केवल कागजों में दर्ज जमीन का क्षेत्रफल ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि मौके पर वास्तविक जमीन, निर्माण का क्षेत्रफल, संपत्ति का वर्तमान उपयोग, किरायेदार और वर्तमान में काबिज व्यक्ति समेत कई बिंदुओं की जांच की जाएगी।

जमीन कितनी, निर्माण कितना—मौके पर होगा मिलान
नगर निगम की टीम प्रत्येक संपत्ति का मौके पर सर्वे करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में संपत्ति का क्षेत्रफल कितना दर्ज है और मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है।
इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित जमीन पर कितना निर्माण हुआ है। यदि मूल निर्माण के बाद दुकान, मकान या अन्य व्यावसायिक ढांचे का विस्तार किया गया है तो उसका भी विवरण रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
संपत्ति का इस्तेमाल आवासीय हो रहा है या व्यावसायिक, यह भी सर्वे का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

किरायेदार से वर्तमान काबिज तक खंगाली जाएगी पूरी जानकारी
जांच में संपत्ति के किरायेदारी रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट में पहला किरायेदार कौन था, वर्तमान में कौन काबिज है और संपत्ति का उपयोग किसके द्वारा किया जा रहा है, इसका विवरण दर्ज किया जाएगा।ट्रस्ट की कुछ संपत्तियों को लेकर यह आरोप सामने आते रहे हैं कि शुरुआती किरायेदार के बाद दूसरे लोगों को संपत्ति का उपयोग दिया गया। कुछ मामलों में किरायेदारी बदलने और स्टाम्प पेपर के माध्यम से व्यवस्था किए जाने की भी बातें सामने आई हैं।
अब सर्वे के दौरान दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्ति का वर्तमान उपयोग किस आधार पर हो रहा है।

बहुमंजिला निर्माण और बढ़ते व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी नजर
ट्रस्ट की कई संपत्तियों के वर्तमान स्वरूप को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। कुछ जगहों पर समय के साथ निर्माण बढ़ने और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है।
नगर निगम की टीम यह भी देखेगी कि कहीं स्वीकृत क्षेत्रफल से अधिक निर्माण तो नहीं हुआ है। साथ ही संपत्ति का उपयोग उस उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं, इसका भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।यदि मौके पर रिकॉर्ड से अलग निर्माण या उपयोग पाया जाता है तो उसकी जानकारी जांच रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।
अब संपत्तिकर का भी होगा आकलन
इस पूरी कवायद का एक महत्वपूर्ण पहलू नगर निगम का राजस्व भी है।यदि ट्रस्ट की संपत्तियां व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग की जा रही हैं तो नियमानुसार संपत्तिकर की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।दुकानों और भवनों का क्षेत्रफल बढ़ने की स्थिति में वास्तविक निर्मित क्षेत्रफल के आधार पर निगम के रिकॉर्ड का मिलान किया,जाएगा।इससे यह भी पता चल सकेगा कि संबंधित संपत्तियों से नियमानुसार कितना संपत्तिकर देय है और कहीं राजस्व संबंधी अंतर तो नहीं है।
धर्मादा ट्रस्ट की मूल भावना पर भी उठ रहे सवाल
किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की स्थापना समाज कल्याण और जनहित के उद्देश्य से की गई थी। ट्रस्ट से अस्पताल, धर्मशाला,शिक्षा,चिकित्सा और अन्य जनहितकारी गतिविधियों की अपेक्षा की जाती रही है।हालांकि, वर्तमान में ट्रस्ट की कई संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक जांच में केवल जमीन और निर्माण ही नहीं, बल्कि संपत्तियों के उपयोग और ट्रस्ट के घोषित उद्देश्यों के बीच संबंध को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोकड़ीतराई की 15 एकड़ जमीन भी जांच के दायरे में
किरोड़ीमल ट्रस्ट से जुड़े मामलों में कोकड़ीतराई की करीब 15 एकड़ जमीन के कथित विक्रय का मामला भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है। इस मामले में अलग से जांच की जा रही है।
वहीं नगर निगम की कार्रवाई फिलहाल निगम क्षेत्र में आने वाली ट्रस्ट की संपत्तियों के सर्वे और राजस्व संबंधी पहलुओं पर केंद्रित है।
पब्लिक ट्रस्ट एक्ट और नियमों का पालन जरूरी
एसडीएम रायगढ़ महेश शर्मा के अनुसार, चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण आदि मामलों में निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। पंजीकरण अधिकारी की अनुमति और पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के प्रावधानों का पालन जरूरी है।ट्रस्ट को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिवर्ष ऑडिट रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होती है।
अब पांच सदस्यीय सर्वे टीम की रिपोर्ट का इंतजार है। 295 संपत्तियों की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद जमीन, निर्माण, किरायेदारी, उपयोग और संपत्तिकर से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।
