भाव में तेजी तो क्या सक्रिय हो गए कोयले के खिलाड़ी?

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(न्यूज़ मिर्ची) रायगढ़ में सोने की तरह कोयले के भाव में तेजी क्या आई, काले हीरे के कारोबार को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म होने लगा। औद्योगिक नगरी में कोयले की बढ़ती कीमतों के बीच अब कुछ डिपो की गतिविधियों, कथित मिलावट और फैक्ट्रियों तक होने वाली सप्लाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कोयले के कारोबार में मुनाफे की संभावनाएं बढ़ते ही कुछ कारोबारी नए सिरे से सक्रिय हो रहे हैं। यहां तक कि बंद पड़े बताए जाने वाले कुछ डिपो में भी गतिविधियों को लेकर चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

भाव में तेजी तो क्या सक्रिय हो गए कोयले के खिलाड़ी?
कोयले की कीमतों में तेजी कारोबारियों के लिए मुनाफे के अवसर बढ़ा सकती है, लेकिन इसी के साथ गुणवत्ता, स्टॉक और परिवहन की निगरानी भी जरूरी हो जाती है। रायगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्र में कोयले की बड़ी मात्रा में खरीदी-बिक्री होती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि डिपो में आने वाले कोयले का रिकॉर्ड कितना पारदर्शी है और फैक्ट्रियों तक पहुंचने वाले माल की गुणवत्ता की जांच किस तरह की जाती है।

यदि कहीं कोयले की गुणवत्ता से छेड़छाड़ कर उसे दूसरे ग्रेड के नाम पर बेचा जा रहा है, तो यह गंभीर मामला होगा। लेकिन इसकी पुष्टि केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि स्टॉक रजिस्टर, बिल, परिवहन दस्तावेज, वजन पर्चियों और प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।

बंद पड़े डिपो में हलचल की चर्चा, आखिर किसकी नजर है?
कोयला कारोबार से जुड़े डिपो की वास्तविक स्थिति की जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है। कौन-सा डिपो चालू है, कौन-सा बंद है, कहां कितना कोयला जमा है और वहां से किन औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति हो रही है—इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के रिकॉर्ड में होना चाहिए।
यदि किसी बंद डिपो से कोयले की आवाजाही की शिकायत मिलती है, तो मौके पर भौतिक सत्यापन कर परिवहन और भंडारण के दस्तावेजों का मिलान किया जाना चाहिए। स्टॉक में अंतर, संदिग्ध बिलिंग या गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।आखिर कारोबार की आड़ में नियमों से खिलवाड़ की गुंजाइश क्यों बनी रहे?
रिसीविंग की सेटिंग का आरोप, फैक्ट्रियों तक पहुंचने वाले कोयले की हो जांच
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी कोयले की रिसीविंग है। डिपो से निकलने वाले कोयले की मात्रा, गुणवत्ता और फैक्ट्री में दर्ज रिसीविंग का मिलान किया जाए, तो कई तरह की अनियमितताओं का पता लगाया जा सकता है। इसलिए संबंधित विभागों को यह जांचना चाहिए कि आपूर्ति के समय दर्ज वजन, कोयले का ग्रेड, गुणवत्ता प्रमाणपत्र और वास्तविक माल एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं।
यदि कहीं रिसीविंग में हेरफेर या मिलावट के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कारोबारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच जरूरी होगी। औद्योगिक इकाइयों को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे अपने यहां आने वाले कोयले की गुणवत्ता और मात्रा का सत्यापन किस प्रक्रिया से करती हैं।
सफेदपोशों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल, संरक्षण है तो सामने आए सच
कोयला कारोबार में प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका और अधिकारियों पर दबाव बनाए जाने संबंधी चर्चाओं ने भी सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक पहचान, रसूख या अधिकारियों के साथ तस्वीरें किसी को दोषी साबित नहीं करतीं, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस शिकायतें और दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कोयले के कारोबार की निगरानी करने वाले विभाग नियमित निरीक्षण कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब विभागों की परीक्षा, जांच होगी या सवाल फाइलों में दब जाएंगे?
रायगढ़ में कोयले के कारोबार से जुड़े सवालों का जवाब अब दस्तावेजी जांच से मिलना चाहिए। संबंधित विभागों को डिपो के लाइसेंस और स्टॉक रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, फैक्ट्रियों की रिसीविंग तथा कोयले के नमूनों की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए। जहां शिकायतें प्रमाणित हों, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
बड़ा सवाल यही है—कोयले के भाव में तेजी के बीच कारोबार की निगरानी कितनी मजबूत है? क्या सभी डिपो और फैक्ट्रियों के रिकॉर्ड का नियमित मिलान हो रहा है? और यदि कहीं मिलावट या रिसीविंग में गड़बड़ी का खेल चल रहा है!!

तो उसे उजागर करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
रायगढ़ की औद्योगिक साख और राजस्व से जुड़े इस मुद्दे पर पारदर्शी जांच जरूरी है। कोयले का कारोबार नियमों से चले, गुणवत्ता से समझौता न हो और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को जांच से छूट न मिले—यही जनहित की मांग है।

न्यूज़ मिर्ची की नजर इस मुद्दे पर बनी रहेगी!!
आरोपों की सच्चाई जांच, दस्तावेज और संबंधित पक्षों के जवाब से ही सामने आएगी।
