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रोजाना 15 से 20 गाड़ियों से कथित कोयला हेराफेरी का आरोप, ट्रांसपोर्टर की भूमिका सहित परिवहन रिकॉर्ड की जांच की मांग
रायगढ़।जिले के कोयला परिवहन से जुड़े एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। तमनार क्षेत्र के गरे पेलमा स्थित CSPDCL माइंस से घरघोड़ा साइडिंग के लिए कोयला लोड कर निकला एक ट्रेलर कथित तौर पर निर्धारित गंतव्य पर पहुंचने के बजाय कारीछापर क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। इस मामले को लेकर कोयले की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मौके पर पुलिस द्वारा संबंधित वाहन की जांच की जा रही है। हालांकि, कोयले की वास्तविक स्थिति, वाहन के निर्धारित गंतव्य और किसी संभावित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले में स्थानीय लोगों ने थाना प्रभारी घरघोड़ा को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि कोयला चोरी या हेराफेरी के प्रमाण मिलें तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

माइंस से साइडिंग तक पहुंचने वाले कोयले पर उठे सवाल
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि गरे पेलमा स्थित CSPDCL माइंस से घरघोड़ा साइडिंग के लिए कोयला लोड कर एक ट्रेलर रवाना हुआ था। लेकिन वाहन के कारीछापर क्षेत्र में मिलने की जानकारी सामने आने के बाद उसके परिवहन मार्ग और निर्धारित गंतव्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कोयला परिवहन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत वाहन किस स्थान से लोड हुआ,उसमें कितनी मात्रा में कोयला भरा गया, उसे किस साइडिंग में खाली किया जाना था।और वास्तव में वह कहां पहुंच~इन सभी बिंदुओं का सत्यापन आवश्यक है। यदि वाहन की आवाजाही और दस्तावेजों में किसी प्रकार की विसंगति मिलती है, तो उससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

रोजाना 15 से 20 गाड़ियों से हेराफेरी का आरोप
इस प्रकरण को लेकर आवेदन में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आवेदक ने सूत्रों से मिली जानकारी के हवाले से आशंका जताई है कि प्रतिदिन लगभग 15 से 20 वाहनों के माध्यम से कोयले की कथित हेराफेरी की जा रही है। मामले में रायगढ़ के एक नामी ट्रांसपोर्टर की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।
हालांकि, प्रतिदिन इतनी गाड़ियों से कोयले की हेराफेरी होने और किसी ट्रांसपोर्टर की संलिप्तता संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं,तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित अनियमितता किसी एक वाहन तक सीमित है या परिवहन व्यवस्था में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
कांटा पर्ची और डिलीवरी रिकॉर्ड का मिलान जरूरी
आवेदक ने पुलिस से मांग की है कि जांच केवल कारीछापर में मिले ट्रेलर तक सीमित न रखी जाए, बल्कि पिछले कुछ महीनों के कोयला परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जाए।

इसके तहत माइंस से कोयला लोड होने के दस्तावेज, वाहन की कांटा पर्ची, डिस्पैच रिकॉर्ड, परिवहन चालान, साइडिंग में कोयला प्राप्त होने का विवरण और खाली किए गए कोयले की मात्रा का मिलान किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर वाहन की जीपीएस लोकेशन, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
इन रिकॉर्डों के मिलान से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित वाहन निर्धारित स्थान तक पहुंचा था या नहीं और परिवहन के दौरान किसी प्रकार की मात्रा संबंधी विसंगति अथवा अन्य अनियमितता हुई थी या नहीं।

खनन कंपनी को नुकसान की आशंका, निष्पक्ष जांच की मांग
आवेदन में आशंका व्यक्त की गई है कि यदि कोयले के परिवहन और डिलीवरी में बड़े स्तर पर अनियमितता होती है, तो इससे खनन कंपनी और संबंधित पक्षों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी वजह से मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया गया है।आवेदक ने पुलिस से संदिग्ध ट्रेलर के कोयले की जांच करने, लोडिंग स्थल एवं निर्धारित गंतव्य का सत्यापन करने तथा वाहन मालिक,चालक, ट्रांसपोर्टर और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल करने का अनुरोध किया है।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी कार्रवाई
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कारीछापर क्षेत्र में मिला ट्रेलर निर्धारित परिवहन प्रक्रिया के तहत वहां मौजूद था या उसके मिलने के पीछे कोई अनियमितता थी।इसका जवाब वाहन के दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से ही सामने आ सकेगा।यदि जांच में कोयला चोरी, धोखाधड़ी या अन्य किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, क्या परिवहन रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी मिलती है और क्या कथित हेराफेरी के आरोपों की पुष्टि होती है—इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और पुलिस की जांच से ही मिलेगा।