सत्ताधारी दल कांग्रेस और समाज के बड़े नेता मामले की निष्पक्ष जांच को।लेकर सामने आए, आर टी आई से मांगी गई है कारवाही सम्बन्धी जानकारियाँ
रायगढ़:- पुरानी कहावत है जो आज भी अक्षरशः सही उतरती कि समरथ को नही दोष गोसाईं मतलब कोई सामर्थवान व्यक्ति कितनी बड़ी गलती भी क्यों न कर ले परन्तु उसे दोषी नही माना जाता है।कुछ इसी तरह आज से 9 महीने पहले शहर के कोतरा रोड थाना अंतर्गत एक लोमहर्षक घटना में दो दलित मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी।घटना के अनुसार घटना तब घटी थी जब निर्माणाधीन भवन के छत पर 33 किलोवोल्ट की विद्युत लाइन जो छत से महज चार-पांच फीट की दूरी पर स्थित थी यह जानते हुए भी निर्मम और लापरवाह भवन मालिक अनिल केडिया और उसका ठेकेदार मनोज गोयल बिना सुरक्षा इंतजाम के मृत मजदूरों से सेंटरिंग का काम करवा रहे थे।तब वृंदावन कॉलोनी के नजदीक एक भवन में छत ढलाई के लिए सेंटरिंग के दौरान हाइटेंशन लाइन के संपर्क में आने से दो मजदूरों की झुलसने से मौत हो गई थी।हादसा दिसंबर महीने की 17 तारीख गुरुवार की देर रात को हुई थी । एक मजदूर ने जैसे ही सरिया उठाया, वह 33 किलोवोल्ट की लाइन से छू गया था ।

जिससे कुछ सेकेंड में ही उसकी मौत हो गई थी। वहीं थोड़ी दूर पर बैठा दूसरा मजदूर भी करंट की चपेट में आ गया था। जिसकी अस्पताल ले जाते वक्त ही मौत हो गई थी।बताया गया था कि उक्त भवन को शहर के रसूखदार व्यवसायी अनिल केडिया वृंदावन कॉलोनी के पास लगभग 5 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में बनवा रहा था।

उसने मकान बनाने का ठेका किसी मनोज गोयल नामक ठेकेदार को दिया था। गुरुवार की रात 3500 वर्गफीट पर ढलाई के लिए सेंटरिंग बांधी जा रही थी।यहां सारंगढ़ क्षेत्र के अंडोला निवासी मजदूर किशोर कुमार निषाद (23) और चेतन वैष्णव (40) रात लगभग 10.30 बजे छड़ बांध रहे थे। इसी दौरान छड़ के एक सिरे को 33 किलोवोल्ट पावर लाइन ने अपनी तरफ खींच लिया था। छड़ को पकड़े मजदूर चेतन की तुरंत मौके पर ही मौत हो गई थी।जबकि किशोर निषाद बुरी तरह झुलस गया था जिसकी इलाज शुरू होने से पहले ही दर्दनाक मौत हो गई थी।। शुक्रवार सुबह जिला प्रशासन, नगर निगम,सी एस ई बी और पुलिस विभाग की टीम मौके पर जांच करने गई तो जरूर थी,उन्होंने जांच के बाद अफसरों की टीम ने निर्माण को भी अवैध बताया था।।टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया था कि भवन से चार फीट की दूरी पर हाइटेंशन लाइन है। तथा निर्माणाधीन भवन की के नजदीक ट्रांसफार्मर का होना भी पाया था, यहां से निकली सप्लाई लाइन की दूरी छत से लगभग चार फीट ही थी । सरिया सीधा करने के दौरान पावर लाइन ले उसे अपनी तरफ खींच लिया था। हाईटेंशन तार के इतने नजदीक भवन निर्माण की अनुमति कैसे और किसने दी थी यह बड़ा प्रश्न था.??इसके अलावा तब निगम अफसर ने यह भी पाया था कि अनिल केडिया के पास 6 हजार स्क्वायर फीट पर बिल्डिंग निर्माण की अनुमति भी नहीं थी। अतः उंक्त निर्माण पूरी तरह से अवैध था। जांच टीम ने तब पाया था कि हादसे के लिए पूरी तरह से भवन का मालिक- अनिल केडिया और निर्माण ठेकेदार- मनोज गोयल जिम्मेदार था।श्रम विभाग के अफसर ने भी यह कहा था कि घटना की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि यहां मजदूरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नही हैं। मृत असंगठित मजदूरों के बीमा और दूसरे प्रावधानों का पालन कियॉ गया है कि नही इसकी जांच होनी अभी बाकी है।। आम तौर पर ठेकेदार ज्यादातर मजदूर रोजी पर ही रखते हैं। इसके बावजूद मालिक पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी निर्माण अवैध है, इसके लिए निगम से अनुमति नहीं ली गई है। 100 प्रतिशत हिस्से में निर्माण हो रहा है। भवन मालिक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अनुसंशा तत्कालीन प्रभारी आयुक्त अभिषेक गुप्ता ने भी की थी।इसके बाद ठेकेदार और मालिक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी।परन्तु कालान्तर में मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।मामले की जांच में की गई कथित लीपापोती को लेकर कामगार मजदूर संगठन का प्रदेश धड़ा अपनी ही सरकार के कार्यप्रणाली से सवाल करने के मूड में आ चुका है। एक प्रमुख कार्यकर्ता और दलित समाज के नेता ने मामले को लेकर उच्च न्यायलय में केश फ़ाइल करने के अलावा नए सिरे से शिकायत किए हने की बात कही है। उसके अनुसार घटना के लिए दोषी व्यपारी अनिल केडिया रसूखदार व्यक्ति है जिसने निष्पक्ष जांच को धन बल से प्रभावित किया है।उक्त घटना में सारंगढ़ के किशोर कुमार निषाद (23) और चेतन वैष्णव (40) जो भवन में रात में बिना सुरक्षा इंतजाम के लगभग 10.30 बजे सेंट्रिग छड़ बांध रहे थे,की मौत हो गई थी।