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रायगढ़।खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन प्लांट में गुरुवार को हुए भीषण औद्योगिक हादसे में नौ माह की मासूम बच्ची भूमि खड़िया की मौत हो गई। हादसे में बच्ची के पिता शिव खड़िया और दादा साहेबराम खड़िया समेत कुल आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनमें से तीन की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।बच्ची की मौत की सूचना अब तक उसके पिता को नहीं दी गई है, जो वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

टायर गलाने के दौरान हुआ भीषण विस्फोट
जानकारी के अनुसार मंगल कार्बन प्लांट में पुराने टायरों को अत्यधिक तापमान वाली भट्ठी में गलाकर लिक्विड कार्बन बनाया जाता है। बुधवार रात को भट्ठी में टायर डाले गए थे, जिन्हें गुरुवार सुबह ठंडा होने के बाद बाहर निकाला जाना था। एक ओर से कार्बन निकालने के बाद जैसे ही बॉयलर का दूसरा हिस्सा खोला गया, अंदर मौजूद उच्च तापमान, मीथेन गैस और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से जोरदार विस्फोट हो गया।
विस्फोट इतना तेज था कि भट्ठी के अंदर बचा हुआ पिघला कार्बन बाहर काम कर रहे मजदूरों के शरीर से चिपक गया, जिससे आग ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद प्लांट में अफरा-तफरी मच गई।
ये हुए थे हादसे का शिकार
हादसे में गंभीर रूप से झुलसने वालों में—
शिव खड़िया (35 वर्ष)
साहेबराम खड़िया (55 वर्ष)
उदासिनी खड़िया (30 वर्ष)
भूमि खड़िया (9 माह)
कौशल पटेल (20 वर्ष), निवासी रजघटा
प्रिया सारथी (32 वर्ष), निवासी ठाकुरदिया
राज और इंद्रीवर (19 वर्ष), दोनों पिता चमार सिंह
सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को इलाज के दौरान भूमि खड़िया ने दम तोड़ दिया, जो इस हादसे में पहली मौत है।
बेटी की मौत से अब भी अनजान पिता
मासूम भूमि के माता-पिता उदासिनी और शिव खड़िया दोनों अस्पताल में भर्ती हैं। शिव खड़िया की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। परिजनों और चिकित्सकों ने अब तक उन्हें उनकी बच्ची की मौत की जानकारी नहीं दी है। वहीं, शिव के पिता साहेबराम की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है।
प्लांट प्रबंधन पर कार्रवाई,गंभीर धाराएं दर्ज
हादसे को लेकर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (आईएचएसडी) और पुलिस ने जांच तेज कर दी है। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 7A (1), 7A (2)(A), 7A (2)(C), 41 और 73 के तहत अधिभोगी सह प्रबंधक अविनाश गर्ग को नोटिस जारी किया गया है।

इसके अलावा मुख्य प्रबंधक रुपेश शर्मा और मैनेजर प्रेमसागर त्रिपाठी के खिलाफ बीएनएस की धारा 125(ए), 125(बी), 287, 288, 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस प्रकरण को गैर इरादतन हत्या के रूप में भी देख रही है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही थी। इतने खतरनाक कार्य के बावजूद मजदूरों को न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए और न ही मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
बताया जा रहा है कि खरसिया क्षेत्र में ऐसे कई छोटे टायर प्लांट और स्लैग क्रशर संचालित हैं, जहां मजदूरों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बड़े उद्योगों में जहां ईएसआईसी और अन्य एजेंसियों की निगरानी होती है, वहीं छोटे प्लांट प्रशासनिक नजर से लगभग बाहर हैं।
जांच जारी, बढ़ सकती हैं धाराएं
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा जांच जारी है। बच्ची की मौत के बाद आरोपियों पर और भी सख्त धाराएं जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।
