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रायगढ़।छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इलाकों में बढ़ता प्रदूषण अब जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। रायगढ़,सरगुजा और बस्तर संभाग के कई क्षेत्रों में उद्योगों से निकलने वाली उड़ती राख (फ्लाई ऐश), जहरीली गैसें और औद्योगिक कचरा हवा, पानी और ज़मीन को बर्बाद कर रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है~कि रायगढ़ के पूंजीपथरा,तमनार, घरघोड़ा, गेरवानी, सराईपाली, पतरापाली और महापल्ली जैसे क्षेत्रों में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।सड़कों पर उड़ती राख के कारण न सिर्फ सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं,बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी लगातार इज़ाफा हो रहा है।

जहां विकसित देशों में पर्यावरण प्रदूषण पर उद्योगों पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान है, वहीं छत्तीसगढ़ में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

उद्योगों की मनमानी से छत्तीसगढ़ जहरीला…
रायगढ़ से बस्तर तक उड़ती मौत
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण का खुला विनाश जारी है। रायगढ़, तमनार, घरघोड़ा, पूंजीपथरा और सरगुजा-बस्तर क्षेत्र आज उद्योगों के खतरनाक कचरे और फ्लाई ऐश की चपेट में हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। खेतों में राख जम रही है, पानी जहरीला हो चुका है और सड़कों पर उड़ती धूल दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है। इसके बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर न तो ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही प्रशासन कोई सख्त कदम उठा रहा है।

पर्यावरणविदों का आरोप है कि सरकार की चुप्पी ने उद्योगों को खुली छूट दे दी है। हर साल प्रदूषण और सड़क हादसों में हजारों लोगों की मौत हो रही है, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही।

सांस लेना बना संघर्ष: उद्योगों के ज़हर में घुट रहा छत्तीसगढ़
रायगढ़ से लेकर बस्तर तक छत्तीसगढ़ आज उद्योगों के प्रदूषण की मार झेल रहा है। फ्लाई ऐश,जहरीली गैसें और औद्योगिक कचरा जल-जंगल-ज़मीन को तबाह कर रहे हैं।पूंजीपथरा, तमनार, सराईपाली और घरघोड़ा जैसे इलाकों में हालात इतने गंभीर हैं कि लोग इसे ‘गैस चैंबर’ कहने लगे हैं।




