
रायगढ़ शहर व जिले की छोटी-बड़ी खबरों के लिए संपर्क करें98279-50350
रायगढ़।औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों और स्थानीय निवासियों से जमीन लेकर सुनहरे सपने दिखाने की कहानी एक बार फिर कटघरे में है। एनटीपीसी लारा परियोजना को लेकर विस्थापितों और प्रभावितों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रोजगार और पुनर्वास के वादे आज भी कागजों तक सीमित हैं, जबकि हजारों परिवार बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

लारा संघर्ष के बैनर तले अनिल चीकू, अरविंद कुमार प्रधान, हरिकिशन पटेल, नारायण साव, मुरली थवाईत, कौशिक गुप्ता सहित अन्य प्रतिनिधियों ने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी लारा परियोजना के तहत पुसौर ब्लॉक के लारा, कांदागढ़, लोहाखान, बोड़ाझरिया, छपोरा, आरमुड़ा, देवलसुर्रा, झिलंगिटार सहित कई गांवों की हजारों एकड़ जमीन वर्ष 2011 में जिला प्रशासन के माध्यम से अधिग्रहित की गई थी।

बताया गया कि 5×800 मेगावाट (4000 मेगावाट) ऊर्जा
परियोजना के लिए लैंड बैंक योजना के तहत जमीन ली गई और अनुबंधानुसार लगभग 1600 विस्थापित परिवारों को स्थाई व नियमित रोजगार दिया जाना था। लेकिन 14–15 वर्ष बीत जाने के बावजूद रोजगार नहीं दिया गया, जिससे प्रभावित परिवारों की नई पीढ़ी दर-दर भटकने को मजबूर है।
लारा संघर्ष का आरोप है कि छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति की कंडिका 11.2.3 के अनुसार यदि नियमित रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो योग्यता के आधार पर रोजगार गारंटी योजना के तहत बेरोजगारी भत्ता दिया जाना अनिवार्य है।

यह भत्ता बीते वर्षों में अरबों रुपये में तब्दील हो चुका है, जिसे ब्याज सहित विस्थापितों को मिलना चाहिए था, लेकिन यह राशि अब तक नहीं दी गई।
आरोप यह भी लगाया गया कि जब बेरोजगार युवक एनटीपीसी लारा प्रबंधन से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अनभिज्ञता का हवाला देकर टाल दिया जाता है। लारा संघर्ष ने संदेह जताया है कि यह बेरोजगारी भत्ता एनटीपीसी लारा, एनटीपीसी रायपुर या नई दिल्ली कार्यालय से जुड़े
अधिकारियों–कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बेरोजगारी भत्ते की राशि कहां गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।
लारा संघर्ष ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो एनटीपीसी लारा के खिलाफ एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर 14 वर्षों से चले आ रहे अन्याय के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।







