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जगदलपुर।छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और दर्दनाक नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी कांड में आखिरकार बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है।जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को उनके विरुद्ध लगाए गए विभिन्न आरोपों और धाराओं में दोषी माना है!

इस बहुचर्चित मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। इसके बाद शेष 10 आरोपियों के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अब दोषी करार दिए गए आरोपियों को कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा।16 सितंबर को होगा सजा का ऐलान झीरम घाटी हमले में 27 लोगों की हत्या और 15 अन्य लोगों की हत्या के प्रयास समेत गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद एनआईए की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी सिद्ध पाया है।

बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने बताया कि एनआईए कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि सजा के निर्धारण के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है। साथ ही बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही है।25 मई 2013…जब झीरम घाटी में रचा गया था खूनी षड्यंत्र झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक है। वर्ष 2013 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। उस समय डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार सत्ता में थी, जबकि कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर रहकर आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई थी।इसी दौरान कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। 25 मई 2013 को सुकमा में परिवर्तन रैली आयोजित की गई थी।

रैली समाप्त होने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा काफिला सुकमा से जगदलपुर के लिए रवाना हुआ।बताया जाता है कि काफिले में करीब 25 वाहन शामिल थे, जिनमें लगभग 200 कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सवार थे।कांग्रेस की टॉप लीडरशिप थी काफिले में मौजूद कांग्रेस के इस काफिले में पार्टी की प्रदेश स्तरीय शीर्ष नेतृत्व मौजूद था। सबसे आगे तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा का वाहन चल रहा था।इसके पीछे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े महेंद्र कर्मा तथा अन्य नेताओं के वाहन थे। बस्तर क्षेत्र के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार समेत पार्टी के कई प्रमुख नेता भी इसी काफिले का हिस्सा थे।यानी एक तरह से छत्तीसगढ़ कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक ताकत एक साथ इस यात्रा में शामिल थी।

पेड़ गिराकर रोका रास्ता और फिर शुरू कर दी अंधाधुंध फायरिंग दोपहर करीब 3.40 बजे कांग्रेस नेताओं का काफिला झीरम घाटी पहुंचा। यहां नक्सलियों ने पहले से ही पूरी योजना के तहत सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया था।जैसे ही वाहनों का काफिला रुका, वहां घात लगाकर बैठे बड़ी संख्या में नक्सलियों ने चारों ओर से हमला बोल दिया। बताया जाता है कि 200 से अधिक नक्सलियों ने काफिले को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन नक्सलियों ने पूरी घाटी को घेर रखा था। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग का सिलसिला चलता रहा।

नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल की हुई मौत नक्सलियों के इस भीषण हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की जान चली गई। हमले में कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी नक्सलियों की गोलियों का निशाना बने।इस घटना ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।महेंद्र कर्मा को पहचानकर बनाया गया निशाना शाम करीब 5.30 बजे फायरिंग का दौर थमने के बाद नक्सली पहाड़ियों से नीचे आए और वाहनों की तलाशी लेने लगे। इस दौरान उन्हें एक वाहन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा मिले।महेंद्र कर्मा को सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े होने के कारण नक्सली अपना बड़ा दुश्मन मानते थे। आरोप है कि नक्सलियों ने उन्हें पहचानने के बाद बेरहमी से उनकी हत्या कर दी।
नाम लेकर पहचाना और उन्हें निशाना बनाया। इससे साफ था कि यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।10 आरोपी पाए गए दोषी एनआईए की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम मुक्का मांडवी कोसा कवासी उर्फ कोसाराम आयता मरकाम मदकामी देवा जोगा मदकामी व बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा महादेव नागशामिल हैं।16 सितंबर पर टिकी निगाहें झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब सभी की निगाहें 16 सितंबर पर टिकी हुई हैं। इसी दिन एनआईए की विशेष अदालत दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।करीब 13 साल पुराने इस मामले में आए फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह एनआईए कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।झीरम घाटी की वह खूनी घटना आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के इतिहास में एक गहरे जख्म के रूप में दर्ज है। अब दोषियों को सजा सुनाए जाने के साथ इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है!
