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रायगढ़।निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की गई। सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले में की गई प्राथमिक जांच के दौरान लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसके बाद अब मामले में आगे की विभागीय जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की आगे की जांच के लिए अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, आईपीएस दीपांशु काबरा को जांचकर्ता अधिकारी और आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
बताया गया कि पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से दोनों अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा गया है। गृह विभाग की स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

⚖️ हाईकोर्ट में सरकार ने रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को मामले की अब तक की जांच और आगे की कार्रवाई से संबंधित जानकारी दी। सरकार के जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि प्राथमिक जांच में लगाए गए आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। ऐसे में अब मामले की आगे की जांच किस अधिकारी के नेतृत्व में होगी, इसकी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।वहीं, जांचकर्ता अधिकारी के रूप में दीपांशु काबरा तथा प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में प्रशांत कुमार अग्रवाल के नाम प्रस्तावित किए जाने की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी गई।

🔎 अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
मामले में अब अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की जानकारी सामने आई है। अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से आगे की जांच और प्रस्तावित अधिकारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

फिलहाल हाईकोर्ट में सरकार द्वारा रखे गए जवाब के बाद निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ चल रही कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, अंतिम विभागीय अथवा न्यायिक निष्कर्ष आगे की कार्यवाही और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
