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15 नवंबर रात 10 बजे तक ही मान्य रहेगी अस्थायी पटाखा विक्रय अनुज्ञप्ति, हर दुकान में 5 किलो का अग्निशामक यंत्र, रेत और पानी रखना अनिवार्य
रायगढ़।दीपावली पर्व के मद्देनजर जिले में अस्थायी आतिशबाजी (पटाखा) दुकानों के संचालन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिला दण्डाधिकारी द्वारा अनुमोदित आदेश के तहत अस्थायी पटाखा विक्रय अनुज्ञप्ति धारकों के लिए 31 अनिवार्य शर्तें एवं प्रतिबंध निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पटाखों की बिक्री के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विस्फोटक अधिनियम 1884, विस्फोटक नियम 2008 तथा शासन के दिशा-निर्देशों के तहत जारी इन शर्तों का पालन प्रत्येक लाइसेंसधारी को करना होगा।

प्रशासन का उद्देश्य पटाखा दुकानों में आगजनी और विस्फोट जैसी संभावित घटनाओं को रोकना, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकानदार का लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा प्रतिबंधित सामग्री की जब्ती और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकेगी।

✍️यह है…नियम पढ़िए नीचे
1. दुकानों के बीच 3 मीटर की दूरी अनिवार्य,अज्वलनशील सामग्री से बनेंगी दुकानें
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी पटाखा दुकानों का संचालन केवल निर्धारित एवं अनुमोदित स्थल पर ही किया जा सकेगा।अनुज्ञप्ति जिस व्यक्ति, स्थान, अवधि और आतिशबाजी सामग्री के लिए जारी की गई है, उसका उपयोग भी उसी सीमा में करना होगा। लाइसेंस का हस्तांतरण अथवा किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
प्रत्येक अस्थायी दुकान का निर्माण अज्वलनशील सामग्री से करना अनिवार्य होगा।

दुकानों के बीच न्यूनतम 3 मीटर की दूरी रखनी होगी। दुकान इस प्रकार बनाई जाएगी कि अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोका जा सके। प्रत्येक दुकानदार को अपना लाइसेंस दुकान में ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा, जहां से वह अधिकारियों और आम लोगों को स्पष्ट दिखाई दे।

2. हर दुकान में 5 किलो का अग्निशामक यंत्र, दो बाल्टी रेत और पानी रखना जरूरी
आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने अग्नि सुरक्षा के कड़े इंतजाम निर्धारित किए हैं। प्रत्येक पटाखा दुकान में न्यूनतम 5 किलोग्राम क्षमता का कार्यशील पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ दो बाल्टी रेत और दो बाल्टी पानी भी उपलब्ध रखना होगा।
दुकान अथवा उसके सुरक्षा क्षेत्र में माचिस, लाइटर, मोमबत्ती, गैस लैंप, तेल से जलने वाले लैंप और किसी भी प्रकार की खुली आग का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विद्युत वायरिंग इंसुलेटेड एवं सुरक्षित होनी चाहिए। असुरक्षित लटकते तारों और खुले स्थान पर स्विच बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक दुकान में अलग विद्युत कट-आउट अथवा बिजली आपूर्ति तत्काल बंद करने की सुरक्षित व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है।
प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि दुकानदार और उनके कर्मचारी आग लगने, विस्फोट होने अथवा किसी अन्य आपातकालीन स्थिति में बचाव के लिए अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं से परिचित रहें।

3. केवल अनुमत हरित पटाखे बिकेंगे, प्रतिबंधित विदेशी पटाखों पर रोक
पटाखों की गुणवत्ता और वैधता को लेकर भी प्रशासन ने सख्त नियम बनाए हैं। दुकानदार केवल अधिकृत एवं विधिवत लाइसेंस प्राप्त निर्माता अथवा कंपनियों से ही आतिशबाजी सामग्री खरीद सकेंगे। अवैध स्रोतों से खरीदे गए पटाखों का भंडारण और विक्रय प्रतिबंधित रहेगा।शासन एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों के अनुरूप अनुमत हरित पटाखों (ग्रीन क्रैकर्स) की ही बिक्री की जा सकेगी। प्रतिबंधित श्रेणी के पटाखे, विदेशी मूल की प्रतिबंधित आतिशबाजी तथा निर्धारित ध्वनि मानकों से अधिक आवाज उत्पन्न करने वाले पटाखों का भंडारण और विक्रय नहीं किया जा सकेगा।
प्रत्येक दुकानदार को पटाखों की खरीदी, प्राप्ति, भंडारण, बिक्री और शेष स्टॉक का पूरा हिसाब निर्धारित प्रारूप में रखना होगा। निरीक्षण के दौरान सक्षम अधिकारियों को यह रिकॉर्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अनुज्ञप्ति में निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखे रखने की भी अनुमति नहीं होगी।
4. सुबह 6 से रात 10 बजे तक ही बिक्री, 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी प्रदर्शन प्रतिबंधित
पटाखा दुकानों के संचालन का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। अस्थायी दुकानों में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही पटाखों की बिक्री की जा सकेगी। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा पटाखा विक्रय स्थल से 50 मीटर की परिधि में आतिशबाजी का प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पटाखों की बिक्री में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है। दुकानदारों को कपड़े, जूट अथवा पर्यावरण अनुकूल बायोडिग्रेडेबल थैलों का उपयोग करना होगा। दुकान लगाने से लेकर हटाने तक स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित लाइसेंसधारी की होगी।
5. प्रत्येक दुकानदार को लगाने होंगे 10 पौधे, 4 फीट ऊंचाई के पौधों पर ट्री-गार्ड भी जरूरी
जिला प्रशासन ने पटाखा दुकानदारों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी सौंपी है। प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी से अपेक्षा की गई है कि लाइसेंस जारी होने के 10 दिनों के भीतर तहसील अथवा नगरीय क्षेत्र के बाउंड्रीवॉलयुक्त शासकीय आश्रम या छात्रावास परिसर में कम से कम 10 पौधों का रोपण एवं संरक्षण सुनिश्चित करे।
पौधों की ऊंचाई न्यूनतम 4 फीट होनी चाहिए और उनकी सुरक्षा के लिए उपयुक्त ट्री-गार्ड लगाना होगा। इसके अलावा दुकानदारों को निर्धारित मैदान शुल्क, साफ-सफाई शुल्क, उपभोक्ता प्रभार और अन्य विधिसम्मत शुल्कों का भुगतान भी करना होगा।
6. 15 नवंबर रात 10 बजे तक ही वैध रहेगा लाइसेंस, उल्लंघन पर होगी वैधानिक कार्रवाई
जिला दण्डाधिकारी द्वारा अनुमोदित आदेश के अनुसार ऑनलाइन जारी अस्थायी पटाखा विक्रय अनुज्ञप्ति कार्यालय की अधिकृत मुहर एवं प्रमाणीकरण तथा निर्धारित शर्तों के अधीन ही मान्य होगी। इसकी वैधता 15 नवंबर 2026 की रात 10 बजे तक निर्धारित की गई है। अवधि समाप्त होने के बाद उक्त अनुज्ञप्ति के आधार पर पटाखों का भंडारण अथवा विक्रय नहीं किया जा सकेगा।
पटाखा दुकान में सुरक्षा संबंधी किसी भी कमी को दूर करने के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का निर्धारित समय में पालन करना होगा। आगजनी, विस्फोट, पटाखों की चोरी, गुमशुदगी अथवा स्टॉक में असामान्य कमी होने पर तत्काल निकटतम पुलिस थाने और अनुज्ञापन प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा।
प्रशासन की दो टूक चेतावनी—सुरक्षा से समझौता नहीं
जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पटाखा विक्रय के दौरान जनसुरक्षा सर्वोपरि होगी। लाइसेंस प्राप्त होना सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं है। निर्धारित शर्तों का उल्लंघन, प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री, तय मात्रा से अधिक भंडारण अथवा लापरवाही पाए जाने पर विस्फोटक अधिनियम 1884, विस्फोटक नियम 2008 एवं अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण, बिक्री पर रोक, सामग्री की जब्ती और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
