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छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन पुलिस अधीक्षक को आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगी फटकार… 👇👇पढ़िए नीचे 👇👇
रायगढ़।छत्तीसगढ़ में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की।मुख्यमंत्री ने इस दौरान विशेष रूप से साइबर अपराध और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ बढ़ रहे साइबर अपराधों और नशे के नेटवर्क के खिलाफ समन्वित और निरंतर कार्रवाई करें।बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध आज समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन चुका है। अपराधियों के तौर-तरीके लगातार बदल रहे हैं, ऐसे में पुलिस को आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि आम जनता को जागरूक करने के लिए निरंतर साइबर अवेयरनेस अभियान चलाए जाएं ताकि लोग ठगी, फिशिंग, ओटीपी फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकें।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि लोग किसी भी ऑनलाइन ठगी या अपराध की सूचना तत्काल दे सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में वर्तमान में 5 साइबर थाने संचालित हैं और 9 नए साइबर थानों का संचालन शीघ्र शुरू किया जाएगा।इससे डिजिटल अपराधों की जांच और नियंत्रण में तेजी आएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अंतर्विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है। पुलिस, बैंकिंग सेक्टर, दूरसंचार कंपनियों और आईटी विभाग के बीच सतत सहयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल-कॉलेजों और पंचायत स्तर पर भी साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि समाज के हर वर्ग तक सही जानकारी पहुंच सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के व्यापार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे का प्रसार न केवल युवाओं के भविष्य को नष्ट करता है बल्कि इससे अन्य अपराधों को भी बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस विभाग राज्य भर में विशेष अभियान चलाकर नशे के कारोबार पर कठोर कार्रवाई करे।

धर्मांतरण और चंगाई सभाओं पर रोक के निर्देश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार धर्मांतरण की घटनाएं और चंगाई सभाओं के आयोजन की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे आयोजनों पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है।साय ने साफ निर्देश दिए— “धर्मांतरण की कोशिशें प्रदेश की सामाजिक समरसता को तोड़ने का प्रयास हैं।

जिला प्रशासन और पुलिस इसे गंभीरता से लें और सख्त कार्रवाई करें।”सीएम ने सरगुजा जिले का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि “धर्मांतरण और बांग्लादेशी घुसपैठ” से जुड़ा एक भी केस दर्ज क्यों नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियां अनदेखी होती रहीं, तो राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो जाएगी।

कोरबा,राजनांदगांव और धमतरी के एसपी पर सख्त नाराजगी
बैठक में मुख्यमंत्री ने चार जिलों के एसपी-कोरबा,राजनांदगांव और धमतरी, महासमुंद — की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाया।कोरबा जिले में हाल ही में हुए खदान मर्डर केस और फ्लोरामैक्स प्रकरण का उल्लेख करते हुए साय ने कहा कि ऐसी घटनाएं पुलिस की लापरवाही का परिणाम हैं। उन्होंने कहा— “एसपी के जूतों की धमक शहर में सुनाई देनी चाहिए।

अपराधियों में पुलिस का खौफ होना चाहिए, ना कि जनता में डर।”
सीएम ने चेतावनी दी कि छोटे अपराधों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े अपराधों को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि “छोटे अपराधों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, तभी समाज में शांति बनी रहेगी।”

सीएम का दो टूक संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी—“अगर पुलिस और प्रशासन में तालमेल नहीं होगा, तो आने वाले समय में गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सभी जिलों के कलेक्टर-एसपी अपने दायित्व को समझें और अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं।”बैठक के अंत में सीएम ने साफ कहा कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से कहा कि कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति किसी भी राज्य के विकास की आधारशिला है। इसलिए, हर जिला प्रशासन को सक्रिय और जवाबदेह रहना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध और नशे के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है और इस दिशा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
