कलेक्टर साहेब~और कब तक छत्तीसगढ़ के गाड़ी मालिकों को न्याय मिलेगा?

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रायगढ़।जिला ट्रेलर मालिक कल्याण संघ,ने ओडिशा राज्य के सुंदरगढ़ जिले अंतर्गत कुलडा, गारगनबहाल और मनोहरपुर क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की ट्रेलर गाड़ियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव और उत्पीड़न को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।संघ का कहना है!
कि जहां प्रतिदिन 650–700 ओडिशा की गाड़ियां बिना किसी रोक-टोक के छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में माल अनलोड कर वापस लौट जाती हैं,वहीं छत्तीसगढ़ की 200–250 गाड़ियों को ओडिशा क्षेत्र में 5–6 दिनों तक खड़ा कर लोडिंग से वंचित किया जा रहा है।

40% लोडिंग के प्रशासनिक निर्णय की अवहेलना का आरोप
जिला ट्रेलर मालिक कल्याण संघ के संरक्षक सतीश चौबे ने कहा कि पूर्व में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था, कि ओडिशा क्षेत्र में संचालित कुल गाड़ियों में कम से कम 40 प्रतिशत लोडिंग छत्तीसगढ़ की गाड़ियों को दी जाएगी।

बावजूद इसके, ओडिशा पक्ष के द्वारा रायगढ़ कलेक्टर की बातों को दर किनारे किया जा रहा है,जानबूझकर छत्तीसगढ़ के वाहन मालिकों और चालकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना और धमकियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

200 से अधिक गाड़ियों को अवैध रूप से रोके जाने का दावा
ट्रेलर मलिक सरबजीत का आरोप है~कि वर्तमान में लगभग 200 छत्तीसगढ़ की गाड़ियों को ओडिशा में अवैध रूप से रोककर रखा गया है,जो बंधक बनाए जाने की श्रेणी में आता है~और प्रथम दृष्टया दंडनीय अपराध है।इस स्थिति के कारण न केवल ट्रेलर मालिकों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है, बल्कि कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है।
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छत्तीसगढ़ में ओडिशा की गाड़ियों पर अस्थायी प्रतिबंध, कलेक्टर-एसपी से हस्तक्षेप की मांग~इन परिस्थितियों से विवश होकर जिला ट्रेलर मालिक कल्याण संघ ने ओडिशा से आने वाली गाड़ियों के छत्तीसगढ़ में प्रवेश पर अस्थायी और शांतिपूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।संघ ने स्पष्ट किया कि यह कदम पूरी तरह आत्मरक्षात्मक है~और किसी भी प्रकार की हिंसा या अवैध मंशा से प्रेरित नहीं है।

संघ ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मार्मिक निवेदन करते हुए इस पत्र को पूर्व सूचना (Prior Intimation) के रूप में अभिलेखित करने, निष्पक्ष व विधिसम्मत हस्तक्षेप करने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो इसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी संबंधित ओडिशा यूनियन और पदाधिकारियों की होगी।
