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ट्रस्ट की संपत्तियां—कौन कर रहा है सौदों का संचालन? रकम किस खाते में गई, रसीद कटी या नहीं और ट्रस्ट रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
रायगढ़, 14 अगस्त 2026। सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर शहर में एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ट्रस्ट की स्टेशन रोड स्थित एक संपत्ति में किराएदार बदलने और कथित तौर पर करीब 1.31 करोड़ रुपये की डील होने की चर्चा ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। इससे भी बड़ा सवाल उस कथित 35 लाख रुपये की ‘नाम ट्रांसफर’ राशि को लेकर है, जिसके संबंध में अलग-अलग चर्चाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन यदि वास्तव में इतनी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है तो कई सवालों का जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है।

आखिर कौन है वह महिला? ट्रस्ट की संपत्ति से जुड़े कथित लेन-देन में भूमिका पर उठे सवाल
अब एक महिला की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। स्टेशन रोड स्थित ट्रस्ट की एक निर्माणाधीन दुकान से जुड़े कथित लेन-देन में महिला का नाम सामने आने की बात कही जा रही है।बताया जा रहा है कि उक्त महिला ने इससे पहले भी शहर में अलग-अलग स्थानों पर अपने व्यापार का संचालन किया है। चर्चाओं के मुताबिक जिसमें शहीद चौक,चक्रधर नगर क्षेत्र के लोचन नगर के सामने और अब स्टेशन रोड़ स्थित ट्रस्ट की निर्माणाधीन दुकान शामिल हैं।यही वजह है कि ट्रस्ट की संपत्ति से जुड़े कथित लेन-देन में उसकी वास्तविक भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बिना दस्तावेजी पुष्टि के किसी व्यक्ति की पहचान या भूमिका को तथ्य के रूप में बताना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि ऐसी कोई भूमिका है तो ट्रस्ट प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि संपत्ति के किराएदार परिवर्तन अथवा कथित लेन-देन की प्रक्रिया कौन संचालित कर रहा था?

35 लाख रुपये की चर्चा ने खड़े किए कई सवाल
सबसे गंभीर चर्चा करीब 35 लाख रुपये की कथित ‘नाम ट्रांसफर’ राशि को लेकर है।
यदि यह राशि वास्तव में ली गई है तो सवाल उठता है—
रकम किसके द्वारा ली गई?
किस खाते में जमा हुई?
क्या इसकी बाकायदा रसीद जारी की गई?
ट्रस्ट की लेखा पुस्तिका में इसका उल्लेख है?
क्या इस लेन-देन पर ट्रस्ट की बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ?
संपत्ति के किराएदार परिवर्तन की अनुमति किसने दी?
क्या ट्रस्ट के नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की गई?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों के साथ सामने आना चाहिए।

1.31 करोड़ की कथित डील—किस कीमत पर बदला किराएदार?
स्टेशन रोड ट्रस्ट संपत्ति को लेकर करीब 1.31 करोड़ रुपये की कथित डील की चर्चा ने मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि यह रकम किसी संपत्ति के अधिकार, कब्जे, किराएदारी या अन्य व्यावसायिक व्यवस्था से संबंधित है, तो उसकी वास्तविक प्रकृति क्या है—यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
किसी ट्रस्ट की संपत्ति में किराएदार बदलने की प्रक्रिया सामान्य निजी संपत्ति के सौदे से अलग सवाल खड़े करती है, क्योंकि यहां संपत्ति का स्वामित्व और प्रबंधन ट्रस्ट के नियमों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के अधीन होता है।
सिर्फ एक संपत्ति नहीं—पूरे ट्रस्ट का ऑडिट क्यों नहीं?

अब सवाल केवल स्टेशन रोड की एक संपत्ति तक सीमित नहीं रह गया है।
रायगढ़ शहर में ट्रस्ट की कई संपत्तियां व्यावसायिक उपयोग में होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में जरूरत है कि ट्रस्ट की सभी संपत्तियों का स्वतंत्र और पारदर्शी ऑडिट कराया जाए।
हर संपत्ति के संबंध में यह जानकारी सामने आनी चाहिए
कुल कितनी संपत्तियां हैं?
कहां-कहां स्थित हैं?
किसे किराए पर दी गई हैं?
वर्तमान किराया कितना है?
किराएदार कब से है?
किराएदार कितनी बार बदला गया?
किस आधार पर बदला गया?
कितनी रकम प्राप्त हुई?
रकम किस खाते में जमा हुई?

‘धर्मादा’ नाम, तो धर्मादा कार्यों का हिसाब भी सामने आए
किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट के नाम में ही जनसेवा और धर्मादा का उद्देश्य दिखाई देता है। ऐसे में शहर का यह सवाल भी जायज है कि ट्रस्ट की संपत्तियों से यदि बड़ी मात्रा में आय हो रही है तो उस आय का उपयोग किन जनहितकारी कार्यों में किया जा रहा है?
कितनी राशि शिक्षा पर खर्च हुई?
कितनी चिकित्सा और सामाजिक कार्यों में लगी?
कितनी राशि दान या सहायता के रूप में दी गई?
और ट्रस्ट के पास वर्तमान में कितनी संपत्ति और कितनी आय है?

इनका पारदर्शी ब्यौरा सामने आने से कई सवालों का जवाब स्वतः मिल सकता है।
अब ट्रस्ट प्रबंधन को सामने आकर जवाब देना चाहिए
स्टेशन रोड की कथित डील और 35 लाख रुपये के कथित ‘नाम ट्रांसफर’ की चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर ट्रस्ट की करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े फैसले कौन ले रहा है!
और उनकी निगरानी कौन कर रहा है?
यदि आरोप निराधार हैं तो ट्रस्ट प्रबंधन को दस्तावेज सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि कोई वित्तीय लेन-देन हुआ है तो उसकी पूरी वैधानिक प्रक्रिया, रसीद, बैंक रिकॉर्ड और ट्रस्ट की बैठक के निर्णय सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ स्टेशन रोड की एक दुकान या एक किराएदार का नहीं है। सवाल उस विरासत का है, जिसे रायगढ़ शहर सेठ किरोड़ीमल के नाम से जानता है।
अब जरूरत है—ट्रस्ट की हर संपत्ति का हिसाब, हर किराए की जानकारी और हर बड़े लेन-देन की पारदर्शी जांच की।प्रशासन को किन बिंदुओं की जांच करनी चाहिए?
1. संपत्ति का मूल स्वामित्व रिकॉर्ड।
2. वर्तमान किरायेदार का नाम।
3. पूर्व किरायेदार का नाम।
4. नाम परिवर्तन की तारीख।
5. किरायानामा/लीज दस्तावेज।
6. ट्रस्ट की बैठक का प्रस्ताव।
7. रसीद बुक की संबंधित प्रविष्टि।
8. ट्रस्ट की कैशबुक और लेजर।
9. ट्रस्ट बैंक खाते में जमा रकम।
10. ऑडिट रिपोर्ट में संबंधित लेन-देन।
11. संपत्ति के मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज।
12. सक्षम प्राधिकारी से ली गई अनुमति, यदि आवश्यक हो।
13. कथित 1.31 करोड़ रुपये की रकम का वास्तविक स्रोत और गंतव्य।
14. 35 लाख रुपये की कथित राशि किस मद में दर्ज की गई।
