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सक्ती, 12 अगस्त 2026। करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं और उनके अधिकारों की आवाज उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनिल तंबोली अब अपनी ही बेटी से जुड़े कथित दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के मामले को लेकर पुलिस प्रशासन से नाराज हैं। उनका आरोप है कि बेटी की शिकायत को दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।

29 मई को की थी बेटी ने शिकायत
अनिल तंबोली के अनुसार उनकी बेटी ने 29 मई 2026 को सक्ती थाने में दहेज और मानसिक उत्पीड़न को लेकर शिकायत दी थी। इसके बाद मामले को परिवार परामर्श केंद्र भेजा गया, जहां 27 जून 2026 को पति-पत्नी के बीच काउंसलिंग हुई।काउंसलिंग के दौरान दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद थाने जाने की सलाह दी गई। तंबोली का कहना है कि 29 जून को परिवार परामर्श केंद्र से बयान की कॉपी सक्ती थाने भेज दी गई, लेकिन इसके बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

पत्रकार का सवाल- जब अपनी बेटी की बारी आई तो क्यों लगाने पड़े चक्कर?
अनिल तंबोली का कहना है कि पत्रकारिता के 25 वर्षों के दौरान उन्होंने आम लोगों से जुड़े कई मामलों को उठाया और उन्हें न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद की। लेकिन अब जब मामला उनकी अपनी बेटी से जुड़ा है तो उन्हें खुद थाने से लेकर एसडीओपी और एसपी कार्यालय तक जाना पड़ रहा है।

उनका कहना है कि इसी स्थिति ने उन्हें भीतर से परेशान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि वह यह जानना चाहते हैं कि शिकायत के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

सम्मान वापस करने का क्यों लिया फैसला?
तंबोली ने कहा कि जब पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मान दिया गया था, तब उन्होंने उसे सम्मान के रूप में स्वीकार किया था। लेकिन अब बेटी के मामले में कार्रवाई नहीं होने से वह इस सम्मान को अपने पास रखना उचित नहीं समझते।इसी वजह से उन्होंने 15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से प्रशस्ति पत्र लौटाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह कदम उनके लिए आसान नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह इसे अपनी मजबूरी मानते हैं।
SP के सामने रखे दो सवाल
अनिल तंबोली ने सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर से दो सवाल भी किए हैं। उन्होंने कहा कि या तो सम्मान देने के लिए गलत व्यक्ति का चयन किया गया या फिर सक्ती थाना प्रभारी के रूप में गलत अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई।उन्होंने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले पर विचार करने की अपील की है।
अब पुलिस के जवाब का इंतजार
मामले में पत्रकार की ओर से पुलिस पर एफआईआर दर्ज नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत पर पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और लगाए गए आरोपों पर प्रशासन क्या जवाब देता है।अनिल तंबोली के सम्मान लौटाने के
ऐलान ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—
जब एक पत्रकार को अपनी ही बेटी के मामले में न्याय की गुहार लेकर पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो आम व्यक्ति की स्थिति क्या होगी?