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रायगढ़/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रायगढ़ जेल में दो मोबाइल फोन बरामद होने की जानकारी सामने आई है, वहीं बिलासपुर जेल को लेकर नशे के कथित कारोबार और जेल कर्मचारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन घटनाओं ने जेलों की आंतरिक सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिलासपुर जेल को लेकर सामने आए आरोपों में दावा किया जा रहा है कि लंबे समय से जेल के भीतर नशीले पदार्थ पहुंचाने का कथित खेल चल रहा है। आरोपों के मुताबिक, जेल के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है और कैदियों तक नशा पहुंचाने के एवज में कथित तौर पर रकम की लेन-देन होती है।

इन्हीं आरोपों के बीच सिपाही जगराम कोसले का नाम भी सामने आ रहा है। आरोप है कि उनके माध्यम से नशीले पदार्थ जेल के भीतर पहुंचाए जाते हैं और कथित रूप से इसके एवज में भुगतान लिया जाता है। यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ रकम डिजिटल माध्यम, जिसमें PhonePe जैसे भुगतान माध्यम शामिल होने की बात कही जा रही है, से प्राप्त की जाती रही है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जेल परिसर में लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं, तो नियमित तलाशी, निगरानी और प्रशासनिक जांच के बावजूद इसकी भनक जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं लगी? जेल जैसी हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था में बाहरी नशीले पदार्थ अथवा प्रतिबंधित सामग्री अंदर पहुंचने के आरोप अपने आप में गंभीर विषय हैं।

वहीं रायगढ़ जेल में दो मोबाइल फोन की बरामदगी ने भी जेल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। जेल के भीतर मोबाइल पहुंचना प्रतिबंधित सामग्री की निगरानी व्यवस्था में सेंध की ओर संकेत करता है और यह जांच का विषय है कि ये मोबाइल किसके पास से मिले, अंदर कैसे पहुंचे और इसके पीछे किसी नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

अब दोनों मामलों को लेकर जेल प्रशासन की जवाबदेही और विभागीय जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर बिलासपुर में लगाए गए नशे के कारोबार के आरोपों की निष्पक्ष जांच, डिजिटल लेन-देन की पड़ताल, जेल परिसर की तलाशी व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल सिर्फ दो मोबाइल या नशे के आरोपों का नहीं है, बल्कि जेल जैसी संवेदनशील व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही का है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी होगी, और यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करना भी जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी?
