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रायगढ़/लैलूंगा/सांप के काटने से केर्राहन निवासी घुराउराम राठिया की मौत के बाद लैलूंगा अस्पताल में पोस्टमार्टम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।मृतक के परिजनों ने अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक दवा और सामग्री के नाम पर उनसे राशि खर्च करवाने तथा प्रक्रिया पूरी होने के बाद नकद पैसे मांगने का आरोप लगाया है।परिजनों के आरोपों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में गरीब मरीजों और उनके परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों के अनुसार, घटना की रात करीब 11:30 बजे घुराउराम राठिया को सांप के काटने के बाद उपचार के लिए लैलूंगा अस्पताल लाया गया था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। परिजनों का कहना है कि करीब 12:30 बजे पोस्टमार्टम किया गया।स्वीपर के माध्यम से मेडिकल दुकान से खरीदवाई दवा मृतक के परिजनों का आरोप है~कि पोस्टमार्टम के लिए आवश्यक दवा अथवा सामग्री की जरूरत बताकर अस्पताल के एक स्वीपर के माध्यम से उन्हें मेडिकल दुकान ले जाया गया। वहां करीब ₹1,074 की दवा खरीदी गई।

परिजनों के मुताबिक, इस दवा का भुगतान उन्होंने PhonePe के जरिए ऑनलाइन किया।
परिजनों का कहना है कि उनके पास इस ऑनलाइन भुगतान का रिकॉर्ड मौजूद है, जिसके आधार पर दवा खरीदने में खर्च हुई राशि की जांच की जा सकती है। उनका सवाल है कि पोस्टमार्टम जैसी सरकारी प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सामग्री की व्यवस्था अस्पताल की ओर से किस तरह की जाती है और यदि कोई सामग्री बाहर से खरीदनी पड़ती है तो उसकी आधिकारिक प्रक्रिया क्या है?

पोस्टमार्टम के बाद ₹1,000 मांगने का आरोप परिजनों ने इसके बाद और भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल के स्वीपर द्वारा उनसे ₹1,000 नकद मांगे गए। परिजनों के अनुसार, उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए राशि कम करने का आग्रह किया। आरोप है कि काफी बातचीत के बाद कथित रूप से ₹600 नकद दिए गए।
यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सवाल गंभीर है कि सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर नकद राशि की मांग किस आधार पर की गई और इसके लिए कोई अधिकृत रसीद अथवा शुल्क निर्धारण था या नहीं।
दवा के ₹1,074 और कथित ₹600 के लेन-देन की जांच जरूरी!
इस पूरे मामले में ₹1,074 की दवा खरीद, PhonePe भुगतान, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और कथित ₹600 नकद भुगतान प्रमुख जांच बिंदु हैं। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।परिजनों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार जब किसी अपने को खो देता है, तब उसे सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं से राहत और सहयोग की उम्मीद होती है। ऐसे में यदि किसी प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त राशि की मांग की गई है तो उसकी जांच होना आवश्यक है।
अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पोस्टमार्टम के दौरान दवा या अन्य सामग्री की खरीद की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि दवा बाहर से खरीदना जरूरी था तो क्या उसकी लिखित पर्ची दी गई थी? मेडिकल दुकान से खरीदी गई सामग्री का बिल उपलब्ध है या नहीं? PhonePe से किए गए भुगतान की पुष्टि होती है या नहीं?और सबसे अहम, पोस्टमार्टम के बाद कथित ₹1,000 की मांग किसने और किस आधार पर की?

इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
CMHO से जांच और कार्रवाई की मांग
मृतक के परिजनों ने मामले की जांच के लिए CMHO स्तर पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दवा खरीद से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया और कथित नकद राशि की मांग की जांच कराने की मांग की है। साथ ही अस्पताल में पोस्टमार्टम सहित अन्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है।

परिजनों का कहना है कि पूरे मामले में यदि किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
हालांकि, यह पूरा मामला फिलहाल मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इस संबंध में लैलूंगा अस्पताल प्रबंधन अथवा BMO का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जायेगा!
