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बिंजकोट/रायगढ़। शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स, बिंजकोट जाने वाली कोयला गाड़ी के सड़क पर फंसने से कुरुभाठा-बड़े जामपाली से बिंजकोट तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम का दायरा कुरुभाठा से नाहरपाली होते हुए नेशनल हाईवे चपले तक जा पहुंचा। सड़क पर ट्रकों की लंबी कतार के बीच आम लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। स्कूली बच्चों से लेकर राहगीरों तक को परेशानी झेलनी पड़ी, वहीं एंबुलेंस भी कुछ देर तक जाम में फंसी रही।
कोयला परिवहन के कारण ग्रामीणों को हो रही परेशानी एक बार फिर सामने आ गई है। सड़क पर भारी वाहनों की लंबी कतार ने यातायात व्यवस्था की पोल खोल दी है। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
कोयला गाड़ियों का दबाव, ग्रामीणों की राह में रोजाना मुसीबत!
ग्रामीणों का आरोप है कि शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स, बिंजकोट के लिए जब से बड़ी-बड़ी कोयला गाड़ियों की लगातार आवाजाही बढ़ी है, तब से क्षेत्र की सड़कों पर आम लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने भारी वाहनों के ओवरलोड होने का भी आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि कोयला गाड़ियों की लगातार आवाजाही और सड़क पर लगने वाले जाम के कारण ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में आने-जाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उद्योग के लिए कोयला परिवहन जारी है, लेकिन इस परिवहन के बीच आम जनता की परेशानी दूर करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच जोर पकड़ रहा है।

स्कूली बच्चों का भविष्य भी जाम के हवाले!
सड़क पर ट्रकों की लंबी कतार का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों की आवाजाही पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे भी जाम में फंस रहे हैं। स्कूल आने-जाने के दौरान उन्हें अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के काम से निकलने वाले ग्रामीणों और राहगीरों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि यदि इसी तरह भारी वाहनों की कतारें सड़कों पर लगती रहीं, तो बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही कैसे सुनिश्चित होगी? क्या कोयला परिवहन की व्यवस्था बनाते समय स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए?

एंबुलेंस तक फंसी, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी!
इस जाम के दौरान एंबुलेंस भी कुछ देर तक फंसी रही। आपातकालीन सेवा का वाहन जाम में फंसने की स्थिति अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में यदि भारी वाहनों की कतार के कारण एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिलता, तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है कि सड़क पर कोयला गाड़ियों का दबाव बढ़ने के बावजूद यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

कुरुभाठा से चपले तक ट्रकों की कतार, गाड़ियां निकालने की कोशिश जारी
जानकारी के अनुसार, कुरुभाठा, बड़े जामपाली से बिंजकोट तक कोयला गाड़ियों की लंबी कतार लगी रही। जाम के चलते कुरुभाठा से नाहरपाली और नेशनल हाईवे चपले तक यातायात प्रभावित हुआ। फंसी हुई गाड़ियों को निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वाहनों का दबाव परेशानी का कारण बना हुआ है।

इस स्थिति ने एक बार फिर औद्योगिक परिवहन और ग्रामीण यातायात के बीच तालमेल की कमी को उजागर किया है। यदि भारी वाहनों की आवाजाही के लिए प्रभावी प्रबंधन नहीं किया गया, तो ऐसी स्थिति दोबारा भी निर्मित हो सकती है।
अब सवाल—ग्रामीणों को राहत कब, जिम्मेदारी कौन लेगा?
शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स के लिए लगातार हो रहे कोयला परिवहन के बीच स्थानीय ग्रामीणों की परेशानियां अब गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरलोड कोयला गाड़ियों और लगातार आवाजाही के कारण उन्हें रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या संबंधित प्रशासन कोयला गाड़ियों में ओवरलोडिंग के आरोपों की जांच करेगा? क्या भारी वाहनों की आवाजाही के लिए कोई व्यवस्थित समय और यातायात प्रबंधन तय होगा?

क्या स्कूली बच्चों और एंबुलेंस के लिए निर्बाध रास्ता सुनिश्चित किया जाएगा?
फिलहाल, कुरुभाठा से बिंजकोट और चपले तक जाम की इस स्थिति ने ग्रामीणों की परेशानी को फिर उजागर कर दिया है। अब क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक हस्तक्षेप और ठोस कार्रवाई का इंतजार है, ताकि उद्योग के परिवहन का बोझ आम जनता की मुसीबत न बन जाए।
