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रायगढ़।जिले के तमनार क्षेत्र में शराब दुकान में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत अवधेश कुमार पासवान की नियुक्ति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी मूल निवासी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया गया। यदि इन आरोपों में सच्चाई सामने आती है, तो यह मामला केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी सरकारी या आबकारी से संबंधित व्यवस्था के अंतर्गत संचालित शराब दुकान में जिम्मेदार पद पर नियुक्ति के दौरान अभ्यर्थी के दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना संबंधित नियुक्तिकर्ता की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति ने कथित तौर पर गलत या फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की है, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच को लेकर है। सी.एल. तमनार में सुपरवाइजर के पद पर अवधेश कुमार पासवान की नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए मूल निवासी प्रमाणपत्र का सत्यापन किस अधिकारी ने किया था? क्या संबंधित तहसील या राजस्व कार्यालय से प्रमाणपत्र की वास्तविकता की पुष्टि कराई गई थी? क्या प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी के रिकॉर्ड से उसका मिलान किया गया था?

यदि नियुक्ति के समय प्रमाणपत्र का विधिवत सत्यापन हुआ था, तो उसकी रिपोर्ट सामने आनी चाहिए। वहीं, यदि बिना उचित जांच के दस्तावेज स्वीकार कर नियुक्ति दे दी गई, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय हो सकता है।

मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित मूल निवासी प्रमाणपत्र को जारी करने वाले प्राधिकारी से उसका सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही नियुक्ति के समय जमा किए गए आवेदन पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज, पहचान संबंधी प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखों की भी जांच होनी चाहिए।

विशेष रूप से यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्रमाणपत्र किस तहसील और किस राजस्व कार्यालय से जारी हुआ, उसमें दर्ज जानकारी सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं तथा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है और उसके आधार पर नौकरी हासिल करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि किसी अधिकारी या एजेंसी की भूमिका में लापरवाही सामने आती है, तो उनकी जिम्मेदारी भी निर्धारित की जानी चाहिए।

आबकारी विभाग और जिला प्रशासन से उठ रहे सवाल
अब इस मामले में रायगढ़ जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। क्या विभाग स्वयं संज्ञान लेकर नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराएगा? क्या संबंधित प्रमाणपत्र की राजस्व विभाग से आधिकारिक पुष्टि कराई जाएगी? क्या नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?

स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल अवधेश कुमार पासवान के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी सामने आना बाकी है।

