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रायगढ़/नई दिल्ली।महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी के दौरान उसकी गिरफ्तारी की वैधता को लेकर सीबीआई और बचाव पक्ष के वकील आमने-सामने आ गए।अदालत में दोनों पक्षों के बीच तीखी कानूनी दलीलें पेश की गईं। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए सीबीआई की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए, जबकि जांच एजेंसी ने नए आदेश का हवाला देकर अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया। सीबीआई ने अदालत से सौरभ की ट्रांजिट रिमांड की मांग भी की है।

अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने सबसे पहले उसकी गिरफ्तारी की वैधानिकता को चुनौती दी। बचाव पक्ष का तर्क था कि भारत सरकार की ओर से ओमान को जिस कार्रवाई की जानकारी दी गई थी, वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत थी। ऐसे में सवाल उठता है कि सीबीआई ने किस कानूनी अधिकार और किस आधार पर सौरभ को गिरफ्तार किया?

वकील ने दलील दी कि प्रत्यर्पण अथवा विदेश से आरोपी को भारत लाने की प्रक्रिया में संबंधित कानूनी आदेश और गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट होना जरूरी है। इसी बिंदु को लेकर बचाव पक्ष ने सीबीआई की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई और अदालत से गिरफ्तारी की वैधता पर विचार करने की मांग की।

CBI का पलटवार—पुराने आदेश के आधार पर न करें आकलन
बचाव पक्ष की दलीलों पर सीबीआई ने भी अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा। जांच एजेंसी का कहना था कि बचाव पक्ष जिस ओमानी आदेश का हवाला दे रहा है, वह पुराना आदेश है। इसके बाद नया आदेश जारी किया गया था, जिसके आधार पर सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई के मुताबिक, नए आदेश में किसी विशेष जांच एजेंसी का नाम अलग से दर्ज नहीं है। इसलिए केवल पुराने आदेश का हवाला देकर गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। एजेंसी ने अदालत से आरोपी की ट्रांजिट रिमांड देने की मांग की, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

कथित फर्जी पासपोर्ट भी सीबीआई ने किया जब्त!इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीबीआई ने सौरभ चंद्राकर का कथित फर्जी पासपोर्ट भी जब्त करने की जानकारी अदालत को दी। जांच एजेंसी इस दस्तावेज को महत्वपूर्ण मान रही है। विदेश में लंबे समय तक रहने और ओमान से भारत लाए जाने की परिस्थितियों को देखते हुए पासपोर्ट से जुड़े तथ्यों की जांच भी मामले का अहम हिस्सा बन सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीबीआई ने सौरभ चंद्राकर का कथित फर्जी पासपोर्ट भी जब्त करने की जानकारी अदालत को दी। जांच एजेंसी इस दस्तावेज को महत्वपूर्ण मान रही है। विदेश में लंबे समय तक रहने और ओमान से भारत लाए जाने की परिस्थितियों को देखते हुए पासपोर्ट से जुड़े तथ्यों की जांच भी मामले का अहम हिस्सा बन सकती है।

सौरभ चंद्राकर को महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी सिंडिकेट का प्रमुख प्रमोटर बताया जाता है। सीबीआई की विशेष टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई है। वह सीबीआई के दो अलग-अलग मामलों में वांछित बताया गया है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए देशभर में सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि इस नेटवर्क से अर्जित रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर इधर-उधर घुमाया जाता था और फिर विदेश भेजा जाता था। इस कथित नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, विदेशों में मौजूद कड़ियों और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को महादेव सट्टा एप मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब अदालत में गिरफ्तारी की वैधता, सीबीआई की ट्रांजिट रिमांड की मांग और बचाव पक्ष की आपत्तियों पर होने वाली सुनवाई अहम होगी। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही से यह भी स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसियां सट्टेबाजी के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोलने में कितनी आगे बढ़ पाती हैं!













