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कांकेर/भानुप्रतापपुर।किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सरकारी व्यवस्था में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। कांकेर जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आसुलखार में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी और बारदाना प्रबंधन के रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया है। संयुक्त जांच समिति के दस्तावेजी परीक्षण और भौतिक सत्यापन में 4,651.20 क्विंटल धान तथा 11,628 बोरा बारदाना कम मिला। इस कथित गड़बड़ी की कुल वित्तीय राशि 1 करोड़ 44 लाख 18 हजार 720 रुपये आंकी गई है।

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धान खरीदी प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इतनी बड़ी मात्रा में धान और बारदाने का हिसाब नहीं मिलने से सहकारी समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

748 किसानों से खरीदा गया था 36,703 क्विंटल धान
मामला खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 का है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आसुलखार में कुल 748 किसानों से 36,703.20 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई थी। किसानों ने शासन की समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत अपनी उपज समिति में बेची थी। खरीदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब समिति के दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक उपलब्ध भंडार का मिलान किया गया!

तब रिकॉर्ड और भौतिक स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
संयुक्त जांच समिति की जांच में 4,651.20 क्विंटल धान की कमी पाई गई। इसके अलावा 11,628 बोरा बारदाने का भी हिसाब नहीं मिला। जांच में सामने आई कुल वित्तीय अनियमितता की राशि 1,44,18,720 रुपये निर्धारित की गई। यह आंकड़ा सामने आने के बाद खरीदी केंद्र में धान के रखरखाव, बारदाने के वितरण और स्टॉक संधारण की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुआ अपराध
संयुक्त जांच समिति के प्रतिवेदन के बाद आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक की ओर से थाना भानुप्रतापपुर में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत और जांच प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 226/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान धान खरीदी प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल—कहां गया धान और बारदाना?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब समिति में 36,703.20 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज थी, तो भौतिक सत्यापन में 4,651.20 क्विंटल धान की कमी कैसे सामने आई? इसी तरह 11,628 बोरा बारदाने का हिसाब रिकॉर्ड में क्यों नहीं मिला?

क्या स्टॉक रजिस्टर के संधारण में लापरवाही हुई या खरीदी और भंडारण की प्रक्रिया में सुनियोजित गड़बड़ी की गई?
इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की विवेचना में सामने आएगा। जांच में दस्तावेजों, खरीदी रिकॉर्ड, भंडारण व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित अनियमितता में गिरफ्तार दोनों प्रभारियों के अलावा अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं।

सरकारी खरीदी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। ऐसे में किसी सहकारी समिति में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता सामने आना महज लेखा-जोखा की गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी खरीदी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है।

अब देखना होगा कि पुलिस जांच में इस पूरे मामले की परतें कितनी खुलती हैं और धान तथा बारदाने की कमी के लिए वास्तविक रूप से कौन-कौन जिम्मेदार पाया जाता है। फिलहाल दो प्रभारियों की गिरफ्तारी के बाद मामले ने क्षेत्र में हलचल मचा दी है।











