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💥💥जो डिमाण्ड नहीं करता वही डायमंड होता है… वरिष्ठ पत्रकार💥💥

✍️वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडे की कलम से…

दीपावली:कभी आपने यह सोचा है कि आपकी दीपावली मनाने के लिए जो लोग दीपावली की रात तक आपके लिए काम करते हैं ,वो दीपावली कैसे मनाते होंगे ?यहीं पर मानवीय संवेदनाओं की परख होती है कि आप कितने संवेदनशील हैं ,आखिर वो भी तो आपसे जुड़े हुए होते है और उनकी भी कुछ आस आपसे जुड़ी होती है ।ये कुछ कहते नहीं हैं बोलते नहीं हैं ,मांगते नहीं है ,आपके लिए काम करते जाते हैं ,आपका जो वैभव ऐश्वर्य ,सम्पन्नता दिखाई देती है ना उनके पीछे इनका भी खून और पसीना होता है ,।बस आप यही उनसे कहते हैं कि दीवाली तक सारा काम पूरा हो जाना चाहिए ।भला आप सोचे भी क्यों कि उनकी दीपावली कैसे मना करती होगी ?आप उनके काम के बदले पैसे जो देते हैं ।क्या सिर्फ मेहनताना दे देने से या बहुत दिल पसीजा तो मिठाई का एक डिब्बा और कुछ सिक्के दे देने से आपका कर्तव्य पूरा हो जाता है ।

🎆जो डिमाण्ड नहीं करता वही डायमंड होता है..🎆

बहुत बड़ी दौलत के मालिक होने के बावजूद भी यदि मन में कुछ पाने की चाह बाकी है तो समझ लेना वो अभी दरिद्र ही है और कुछ पास में नहीं फिर भी जो अपनी मस्ती में झूम रहा है उससे बढ़कर भी कोई दूसरा करोड़ पति नहीं हो सकता है।

सुदामा को गले लगाने के लिए आतुर
श्री द्वारिकाधीश इसलिए भागकर नहीं गए कि सुदामा के पास कुछ नहीं है अपितु इसलिए गए कि सुदामा के मन में कुछ भी पाने की इच्छा अब शेष नहीं रह गयी थी।

इसलिए ही संतों ने कहा है कि जो कुछ नहीं माँगता उसको भगवान स्वयं को दे देते हैं। द्वारिकापुरी में आज सुदामा राजसिंहासन पर विराजमान हैं और कृष्ण समेत समस्त पटरानियाँ चरणों में बैठकर उनकी चरण सेवा कर रही हैं।

सुदामा अपने प्रभाव के कारण नहीं पूजे जा रहे हैं अपितु अपने स्वभाव और कुछ भी न चाहने के भाव के कारण पूजे जा रहे हैं।

सुदामा की कुछ भी न पाने की इच्छा ने उन्हें द्वारिकापुरी का राजसिंहासन प्रदान कऊर दिया मानो कि भगवान ये कहना चाह रहे हों कि जिसकी अब और कोई इच्छा बाकी नहीं रही वो मेरे ही समान मेरे बराबर में बैठने का अधिकारी बन जाता है।

मनुष्य की कामना शून्यता ही उसे अबसे अधिक मूल्यवान, अनमोल और उस प्रभु का प्रिय बना देती है।

जिसमें डिमांड नहीं होती वो ही डायमंड होता है..!!

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