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नई दिल्ली। वाहन की बिक्री के बाद पंजीयन (RC) हस्तांतरण में देरी या चूक को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। विधिक विशेषज्ञों के अनुसार केवल RC ट्रांसफर न होने से वाहन की बिक्री स्वतः अमान्य नहीं हो जाती, यदि खरीदार और विक्रेता के बीच बिक्री की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गई हो।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि वाहन विक्रेता ने निर्धारित राशि प्राप्त कर वाहन का भौतिक हस्तांतरण कर दिया हो तथा बिक्री संबंधी दस्तावेज जैसे सेल लेटर और फॉर्म 29-30 की प्रक्रिया पूरी कर दी गई हो, तो विक्रेता और खरीदार के बीच बिक्री प्रभावी मानी जा सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि RC में नाम परिवर्तन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके महत्वपूर्ण कानूनी प्रभाव भी होते हैं। कई मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि दुर्घटना दावों और तृतीय पक्ष उत्तरदायित्व जैसे मामलों में RC में दर्ज स्वामी की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन विक्रय और पंजीयन हस्तांतरण दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं!!

लेकिन वाहन विक्रय के बाद नए मालिक के नाम पर RC हस्तांतरण करवाना आवश्यक है। ऐसा न होने पर भविष्य में चालान, बीमा विवाद अथवा दुर्घटना संबंधी मामलों में पुराना मालिक भी कानूनी विवादों में घिर सकता है।
विधिक विशेषज्ञों ने वाहन खरीदने और बेचने वाले नागरिकों को सलाह दी है कि बिक्री के बाद संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया समय पर पूरी करें और RTO में पंजीयन हस्तांतरण अवश्य करवाएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता से बचा जा सके।
(नोट: यह सामग्री सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी विशेष परिस्थिति में विधिक सलाह लेना उचित होगा।)
