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रायगढ़, 1 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की विभिन्न केंद्रीय एवं जिला जेलों में बंद 101 उम्र केद के कैदियों को समयपूर्व रिहा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला जेल सुधार और पुनर्वास की नीति के तहत लिया गया है, ताकि सुधार का परिचय देने वाले बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल सके।

राज्य शासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, रिहा किए जाने वाले बंदियों का चयन पूरी तरह निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया है। इसके लिए जेल में अच्छे आचरण, अनुशासित व्यवहार, सुधारात्मक गतिविधियों में भागीदारी, जेल प्रशासन की रिपोर्ट तथा संबंधित जिला प्रशासन की अनुशंसा को आधार बनाया गया है।
समयपूर्व रिहाई नीति के तहत लिया गया फैसला
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय जेल अधिनियम और छत्तीसगढ़ शासन की समयपूर्व रिहाई नीति के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। पात्र बंदियों के मामलों की समीक्षा के बाद ही उन्हें रिहाई के लिए स्वीकृति दी गई है।
समाज की मुख्यधारा में लौटने का मिलेगा अवसर
सरकार का मानना है कि जिन बंदियों ने लंबे समय तक जेल में अनुशासित जीवन बिताया है और अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखाया है, उन्हें एक नया अवसर मिलना चाहिए। ऐसे बंदियों की रिहाई से उनके सामाजिक पुनर्वास को भी बढ़ावा मिलेगा और वे सामान्य जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।
जेल प्रशासन को दिए गए आवश्यक निर्देश
गृह विभाग द्वारा सभी संबंधित जेल अधीक्षकों को रिहाई की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर पात्र बंदियों को रिहा किया जाएगा।
सरकार की सुधारात्मक सोच का हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि समयपूर्व रिहाई की यह व्यवस्था केवल सजा पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के सुधार और पुनर्वास की अवधारणा को भी मजबूत करती है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम इसी सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है!!


