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रायगढ़।शास्त्रीय संगीत, कथक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की पहचान माने जाने वाले रायगढ़ के 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह में इस बार सुरों के साथ विवाद भी गूंज उठा। जिस मंच से देश की समृद्ध कला और संस्कृति का संदेश जाना चाहिए, वहां ‘बीड़ी जलाई ले जिगर से पिया’ और ‘चुम्मा-चुम्मा दे दे’ जैसे बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

समारोह की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में इंडियन आइडल फेम अमित साना की प्रस्तुति के दौरान गाए गए इन गीतों पर भाजपा के राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। सांसद की नाराजगी इस कदर सामने आई कि वे कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर वापस लौट गए। अब इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संस्कृति मंत्री से शिकायत करने की बात कही जा रही है।

चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक गरिमा और गीतों के चयन को लेकर उठे इस विवाद ने आयोजन समिति और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शास्त्रीय कथक के बाद बॉलीवुड गीतों पर विवाद, सांसद ने जताई नाराजगी
41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना एवं गुरु सोमा दास के मार्गदर्शन में नटराज नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने शानदार कथक प्रस्तुति दी।शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति के बाद मंच पर इंडियन आइडल फेम अमित साना अपने ग्रुप के साथ पहुंचे।

अमित साना की प्रस्तुति के दौरान जैसे ही ‘बीड़ी जलाई ले जिगर से पिया’ और ‘चुम्मा-चुम्मा दे दे’ जैसे गीत गूंजे, समारोह के स्वरूप और गीतों के चयन को लेकर सवाल उठने लगे।कार्यक्रम में मौजूद राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने इन गीतों पर कड़ी आपत्ति जताई। सांसद ने कहा कि चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच पर इस तरह के गीतों की प्रस्तुति उचित नहीं है।उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया और वापस लौट गए।
‘चक्रधर समारोह की गरिमा को ठेस’, मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चक्रधर समारोह केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना का प्रतीक है।
उनका कहना है कि ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुतियों के चयन में आयोजन की गरिमा और सांस्कृतिक परंपरा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सांसद ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संस्कृति मंत्री के समक्ष उठाएंगे। इस संबंध में लिखित शिकायत करने के साथ ही मौखिक रूप से भी अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।

सांसद की नाराजगी के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर चक्रधर समारोह जैसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में गीतों का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया? क्या कलाकारों की प्रस्तुति तय करते समय समारोह की सांस्कृतिक पहचान और गरिमा को प्राथमिकता दी गई थी?
राज्यपाल के आगमन से पहले कार्यक्रम शुरू करने पर भी उठे सवाल
चक्रधर समारोह को लेकर विवाद केवल बॉलीवुड गीतों तक सीमित नहीं है। समारोह के शुभारंभ के दौरान राज्यपाल रमेन डेका के आगमन से पहले गणेश वंदना के बाद कार्यक्रम शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है।
इसके अलावा कार्यक्रमों के क्रम और दीप प्रज्वलन को लेकर भी कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं। इन घटनाक्रमों ने आयोजन की व्यवस्थाओं और निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है।
हालांकि, इन आरोपों और आपत्तियों पर जिला प्रशासन एवं आयोजन समिति का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

सोशल मीडिया पर भी फूटा गुस्सा, चयन समिति से जवाब मांग रहे लोग
चक्रधर समारोह में बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कार्यक्रम में शामिल कुछ लोगों ने फेसबुक पर पोस्ट साझा कर गीतों के चयन और समारोह की मौलिकता को लेकर सवाल उठाए।एक यूजर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि चक्रधर समारोह में ‘जुम्मा-चुम्मा दे दे’ और ‘बीड़ी जलाई ले’ जैसे गीतों की शानदार शास्त्रीय प्रस्तुति हुई। इसके लिए जिला प्रशासन को बधाई।

एक अन्य यूजर ने समारोह की सांस्कृतिक पहचान का हवाला देते हुए कलाकारों के चयन पर सवाल उठाया और पूछा कि चयन समिति इस तरह की प्रस्तुतियों को चुने जाने पर क्या स्पष्टीकरण देगी।सोशल मीडिया पर आई इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि समारोह में प्रस्तुत गीतों को लेकर एक वर्ग में नाराजगी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर व्यक्त विचारों को पूरे जनसमुदाय की राय नहीं माना जा सकता।
अब प्रशासन के जवाब का इंतजार, क्या तय होंगे प्रस्तुतियों के चयन के मानक?
रायगढ़ का चक्रधर समारोह देशभर में शास्त्रीय संगीत, कथक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।ऐसे में समारोह के मंच पर बॉलीवुड गीतों को लेकर उठे विवाद ने आयोजन की गरिमा और कलाकारों के चयन की प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।

राज्यसभा सांसद की नाराजगी और मुख्यमंत्री से प्रस्तावित शिकायत के बाद अब आयोजन समिति तथा जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
बड़ा सवाल यही है कि चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में प्रस्तुतियों का चयन किन मानकों पर होता है और क्या भविष्य में समारोह की सांस्कृतिक पहचान एवं गरिमा को ध्यान में रखते हुए चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे?
क्या कहते हैं-सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह
न्यूज़ मिर्ची 24 के सवाल पर उन्होंने कहा कि

चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में कलाकारों का चयन आखिर किस प्रक्रिया के तहत किया गया? अगर चयन समिति की बैठक हुई है, तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। और अगर बैठक हुई ही नहीं, तो फिर किस आधार पर कलाकारों का चयन कर लिया गया?

इसके अलावा आगे कहा कि जिला प्रशासन ने बिना किसी राय-मशविरा और मुझे विश्वास में लिए कलाकारों का चयन किया है।यह बेहद आपत्तिजनक है।जनप्रतिनिधि को अंधेरे में रखकर इस तरह फैसले लेना आखिर कैसी प्रशासनिक कार्यप्रणाली है?

जिला प्रशासन ने मेरे साथ विश्वासघात किया है…देवेंद्र
चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि बैठक कब हुई, किसकी सहमति से हुई और कलाकारों का चयन किस आधार पर किया गया?”
