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रायगढ़,शहर और आसपास विकसित हो रही कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए निर्धारित भूमि को सुरक्षित करने प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर राजस्व विभाग द्वारा कॉलोनाइजरों के अभिलेखों की जांच की जा रही है।इसी कार्रवाई के बीच तीन कॉलोनाइजरों ने करीब 3 एकड़ EWS भूमि शासन के पक्ष में रजिस्ट्री के माध्यम से हस्तांतरित की है।

इस कार्रवाई के बाद रायगढ़ अनुभाग में अब तक विभिन्न कॉलोनाइजरों से लगभग 13 एकड़ EWS भूमि शासन के पक्ष में सुरक्षित की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के लिए निर्धारित भूमि को सुरक्षित रखना और उसका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना इस पूरी कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य है।
कलेक्टर के निर्देश के बाद शुरू हुई जांच
प्रशासन के अनुसार कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने 1 सितंबर 2025 को जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को EWS भूमि से संबंधित अभिलेखों की जांच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही जांच के बाद शासन के पक्ष की EWS भूमि को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था।

निर्देश के बाद रायगढ़ अनुभाग के अंतर्गत रायगढ़ और पुसौर तहसील में कॉलोनियों तथा उनसे संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच शुरू की गई। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कॉलोनाइजरों द्वारा विकसित की गई कॉलोनियों में EWS के लिए निर्धारित भूमि का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है और वह भूमि शासन के पक्ष में सुरक्षित है या नहीं।
17 कॉलोनाइजर चिन्हित, 12 के रिकॉर्ड की जांच
रायगढ़ अनुभाग में कुल 17 कॉलोनाइजरों को चिन्हित किया गया। इनमें से अब तक 12 कॉलोनाइजरों के EWS भूमि से संबंधित अभिलेखों की जांच की जा चुकी है।जांच के दौरान विभिन्न ग्रामों में कुल 10 एकड़ 12 डिसमिल EWS भूमि उपलब्ध पाई गई।

राजस्व अधिकारियों द्वारा इस भूमि को सुरक्षित करते हुए अपने कब्जे में लिया गया है।
यह भूमि पण्डरीपानी, बड़े अतरमुड़ा,पुसौर,छींच, गोपालपुर सहित अन्य ग्रामों में स्थित बताई गई है।
रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं तो कॉलोनाइजरों को नोटिस
जांच के दौरान शेष पांच कॉलोनाइजरों के अभिलेखों में EWS भूमि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर प्रशासन ने अब अगला कदम उठाया है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), रायगढ़ द्वारा संबंधित कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी कर EWS भूमि से जुड़े दस्तावेज, अभिलेख और पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे साफ है कि प्रशासन अब केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि EWS भूमि की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

तीन कॉलोनाइजरों ने शासन के पक्ष में की रजिस्ट्री
इसी कार्रवाई के तहत तीन कॉलोनाइजरों द्वारा करीब 3 एकड़ भूमि शासन के पक्ष में EWS भूमि के रूप में रजिस्ट्री के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक—
श्री सांई आनंद विहार द्वारा ग्राम जोरापाली के खसरा नंबर 15000 में 0.341 हेक्टेयर भूमि।हाईटेक बिल्डर एंड डेवलपर्स द्वारा ग्राम बड़े अतरमुड़ा के खसरा नंबर 15002/1 में 0.483 हेक्टेयर भूमि।
स्वर्णभूमि बिल्डर्स द्वारा ग्राम पण्डरीपानी के खसरा नंबर 56/1 एवं 56/2 में 0.428 हेक्टेयर भूमि।इन तीनों मामलों में संबंधित भूमि को शासन के पक्ष में EWS भूमि के रूप में रजिस्ट्री के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।
अब शेष प्रकरणों पर भी नजर
राजस्व विभाग के मुताबिक EWS भूमि से जुड़े अभिलेखों की जांच और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। शेष प्रकरणों में दस्तावेजों की जांच के बाद यदि EWS भूमि से संबंधित स्थिति सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई से कॉलोनाइजरों द्वारा विकसित की जा रही कॉलोनियों में EWS के लिए निर्धारित भूमि का रिकॉर्ड स्पष्ट होने की उम्मीद है। साथ ही शासन के पक्ष में निर्धारित भूमि को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
13 एकड़ EWS भूमि हुई सुरक्षित
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर चल रही इस पूरी कार्रवाई के परिणामस्वरूप रायगढ़ अनुभाग में विभिन्न कॉलोनाइजरों से अब तक लगभग 13 एकड़ EWS भूमि शासन के पक्ष में सुरक्षित की जा चुकी है। राजस्व विभाग द्वारा शेष मामलों में भी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और आवश्यकतानुसार नोटिस तथा अन्य नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि EWS और वंचित वर्गों के लिए निर्धारित भूमि सुरक्षित रहे और उसका उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार ही हो!
