बिना बिल-जीएसटी करीब 150 पिकअप माल पहुंचने का दावा
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हटरी, संजय कॉम्प्लेक्स से लेकर सिंधी कॉलोनी तक गोदामों में पटाखों का स्टॉक, घनी आबादी के बीच भंडारण से हादसों का खतरा!!
रायगढ़।दीपावली के त्योहार से पहले रायगढ़ का पटाखा बाजार इस बार अवैध कारोबार के गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। शहर में पटाखों की भारी आवक के बीच बिना बिल और बिना जीएसटी के कारोबार किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि खरसिया और चंद्रपुर से लगभग 150 पिकअप पटाखे रायगढ़ पहुंचाए गए हैं। इनमें करीब 100 पिकअप माल खरसिया और 50 पिकअप चंद्रपुर से आने की बात कही जा रही है। यदि यह जानकारी सही है तो यह मामला केवल कर चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित भंडारण और परिवहन से जुड़े नियमों की अनदेखी का भी गंभीर विषय है।

पटाखों के कारोबार में अच्छा मुनाफा होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में व्यापारी दीपावली के दौरान अस्थाई लाइसेंस लेकर दुकानें संचालित करते हैं। नियमानुसार पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए निर्धारित अनुमति एवं सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी है। लेकिन इस बार शहर में पटाखों की आपूर्ति और भंडारण को लेकर जिस तरह के आरोप सामने आ रहे हैं, उसने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक इस बार खरसिया और चंद्रपुर के तीन बड़े पटाखा कारोबारियों ने रायगढ़ के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। चंद्रपुर के एके अग्रवाल नामक कारोबारी के पास बड़ी मात्रा में पटाखों का स्टॉक होने और अलग-अलग गोदामों में माल रखे जाने की चर्चा है। वहीं खरसिया के अनूप और चंचल नामक दो कारोबारियों के माध्यम से भी बड़ी खेप रायगढ़ भेजे जाने का दावा किया जा रहा है।

आरोप है कि इन कारोबारियों से बिना बिल और जीएसटी के कम कीमत पर पटाखों की सप्लाई की जा रही है। सस्ती दरों का फायदा उठाने के चक्कर में रायगढ़ के कुछ अस्थाई लाइसेंसधारकों ने भी बिना बिल के माल खरीद लिया। इससे वैध तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारियों के सामने प्रतिस्पर्धा का संकट खड़ा हो सकता है। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे किन वाहनों से आए, परिवहन के दौरान दस्तावेजों की जांच किसने की और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?

संजय कॉम्प्लेक्स से हटरी तक गोदामों में बारूद का स्टॉक!
शहर में पटाखों के भंडारण को लेकर सबसे चिंताजनक स्थिति घनी आबादी वाले इलाकों की बताई जा रही है। संजय कॉम्प्लेक्स, हटरी, कोतरा रोड, सिंधी कॉलोनी, बेलादुला, दरोगापारा, इंदिरा नगर, धांगरडीपा, और चांदनी चौक सहित कई स्थानों पर पटाखों का स्टॉक रखे जाने की जानकारी सामने आई है।

इनमें कई इलाके ऐसे हैं जहां सड़कें संकरी हैं और आसपास घनी आबादी है। ऐसे स्थानों पर यदि निर्धारित क्षमता से अधिक पटाखों का भंडारण किया गया है तो आगजनी अथवा विस्फोट जैसी घटना की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। संकरी गलियों के कारण दमकल वाहनों को भी मौके तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

प्रशासन के सामने अब यह जांचना जरूरी है कि संबंधित गोदामों के पास वैध भंडारण लाइसेंस है या नहीं, लाइसेंस में कितनी मात्रा की अनुमति दी गई है और वास्तविक स्टॉक कितना है। केवल अस्थाई दुकान का लाइसेंस होना किसी भी स्थान पर असीमित मात्रा में पटाखे रखने की अनुमति नहीं देता।

एक अस्थाई लाइसेंसधारक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि कारोबारियों को जहां कम कीमत पर पटाखे मिलते हैं, वे वहीं से माल खरीदते हैं। उसके मुताबिक खरसिया और चंद्रपुर से बिना बिल और जीएसटी के पटाखे मिल जाते हैं, जिससे खरीद की लागत कम हो जाती है।

यह बयान पूरे कारोबार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यदि बड़ी मात्रा में बिना वैध दस्तावेजों के पटाखों की खरीद-बिक्री हुई है तो जीएसटी विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए। साथ ही परिवहन के दौरान ई-वे बिल और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की अनिवार्यता लागू होने की स्थिति का भी परीक्षण जरूरी है!

रायगढ़ जिले में इस बार कुल 373 अस्थाई पटाखा लाइसेंस जारी किए जाने की जानकारी है। लाइसेंस की प्रक्रिया में पुलिस की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। आवेदकों को संबंधित थाने से एनओसी प्राप्त कर प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करनी थी। इसके बाद पात्र आवेदकों को अस्थाई लाइसेंस जारी किए गए।

हालांकि आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोगों ने दूसरे नामों से आवेदन कर कारोबार में प्रवेश किया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में लाइसेंसधारकों की पहचान, वास्तविक कारोबारियों की भूमिका और भंडारण स्थलों का सत्यापन किया जाना जरूरी है।

जिले में कहां कितने अस्थाई लाइसेंस?
क्षेत्र लाइसेंस
रायगढ़ 202
धरमजयगढ़ 33
खरसिया 74
तमनार 46
पुसौर 38
कुल 373
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल, जांच की मांग तेज
रायगढ़ में पटाखों की भारी आवक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कथित भंडारण को लेकर अब जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और जीएसटी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शहर के अलग-अलग इलाकों में गोदामों का औचक निरीक्षण कर पटाखों की मात्रा, लाइसेंस, खरीद के बिल, परिवहन दस्तावेज और सुरक्षा इंतजामों की जांच की जानी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में 373 अस्थाई लाइसेंस जारी किए गए हैं तो इन लाइसेंसधारकों के भंडारण स्थलों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखे जमा करने वालों की जांच हुई है? क्या घनी आबादी के बीच बने गोदामों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है?

त्योहार के दौरान थोड़े से आर्थिक मुनाफे के लिए शहरवासियों की सुरक्षा को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। प्रशासन को आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करनी चाहिए।







