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रायगढ़/घरघोड़ा | विशेष रिपोर्ट
सरकारें भले ही विधानसभा में नियमों और सख्ती के दावे करती हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। घरघोड़ा ब्लॉक के नावापारा टेड़ा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां आवंटित कृषि भूमि पर खुलेआम फ्लाई ऐश का निपटान किया जा रहा है।
जिस जमीन पर हाल ही में किसान ने धान की खेती कर फसल बेची, उसी खेत में अब बिना किसी गड्ढे के जहरीली राख डंप की जा रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब किसकी अनुमति से हो रहा है?

NGT के नियमों की उड़ रही धज्जियाँ
National Green Tribunal के स्पष्ट निर्देश हैं कि फ्लाई ऐश का निपटान कृषि और वन भूमि पर नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद घरघोड़ा में खुलेआम इन नियमों की अनदेखी हो रही है, जिससे पर्यावरण और किसानों दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।
🏛️ मंत्री के दावे जमीन पर फेल
हाल ही में ओपी चौधरी ने विधानसभा में फ्लाई ऐश निपटान के लिए मॉडल एसओपी लागू करने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कृषि भूमि पर राख डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
लेकिन मौजूदा हालात मंत्री के दावों को झुठलाते नजर आ रहे हैं।

राजस्व विभाग की भूमिका संदिग्ध
नायब तहसीलदार का तर्क:
संबंधित खसरा नंबर 311/4 पर पर्यावरण स्वीकृति मिलने के बाद काम होने की बात कही जा रही है।लेकिन सवाल यह है कि क्या पर्यावरण स्वीकृति कृषि भूमि को बंजर बनाने की अनुमति देती है?

पटवारी का बयान:
पटवारी लोकेश पैकरा ने स्वीकार किया कि भूमि कृषि योग्य है और आसपास खेती भी हो रही है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई कॉलम नहीं था जिसमें आसपास की खेती का उल्लेख किया जा सके।
अब सवाल यह उठता है कि क्या नियमों का पालन केवल “कॉलम” के आधार पर होगा?
किसानों की जमीन पर ‘राख’ की मार
सरकार का उद्देश्य भूमिहीनों को जमीन देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन यहां उन्हीं जमीनों पर उद्योगों की नजर पड़ चुकी है।धान उगाने वाली उपजाऊ जमीन अब जहरीली राख के ढेर में तब्दील हो रही है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा
फ्लाई ऐश का यह अवैध निपटान न केवल मिट्टी की उर्वरता को खत्म कर रहा है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है। हवा में उड़ती राख लोगों के फेफड़ों तक पहुंच रही है।

बड़ा सवाल:
क्या महिला पत्रकारिता की आड़ में अधिकारी दबाव में नियमों को दर किनारे किया जा रहा है?
अब नजर कार्रवाई पर
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
