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रायगढ़।पूंजीपथरा थाना क्षेत्र अंतर्गत गडगांव–सरायपाली स्थित रूपाणाधाम स्टील प्रा. लि. में 08 अप्रैल 2026 को हुए दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने अब बड़ा रूप ले लिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए श्रमिक दीपक चौहान की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। श्रमिक की मौत ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपक चौहान प्लांट में बायलर एवं ऊंचाई से जुड़े कार्य में संलग्न थे।

इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और प्लांट प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद प्रदेश महासचिव राकेश पांडे के निर्देश पर युवा कांग्रेस रायगढ़ सक्रिय हो गई। जिला अध्यक्ष उस्मान बेग के नेतृत्व में 09 अप्रैल 2026 को थाना पूंजीपथरा में पहला लिखित आवेदन सौंपा गया, जिसमें प्लांट मालिक और प्रबंधन पर श्रमिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की कमी और गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए।

वहीं, अब श्रमिक की मौत के बाद आज पुनः थाना में पूरक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं को जोड़ते हुए प्लांट मालिक एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
युवा कांग्रेस ने इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को भी ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में तत्काल FIR दर्ज करने, दोषी प्लांट मालिक और प्रबंधन की गिरफ्तारी, घटना स्थल के CCTV फुटेज को जब्त करने, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग से संयुक्त तकनीकी जांच कराने तथा मृतक के परिजनों को वैधानिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।

जिला अध्यक्ष उस्मान बेग ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि, “08 अप्रैल को हादसा हुआ, 09 अप्रैल को पहला आवेदन दिया गया और अब मौत के बाद दूसरा आवेदन भी सौंप दिया गया है। यदि जल्द FIR दर्ज कर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की जाती, तो युवा कांग्रेस आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से FIR दर्ज किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे आक्रोश और बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं, श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी जल्द कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
