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रायगढ़।गौमाता की सेवा और संरक्षण के दावों के बीच शहर की चक्रधर गौशाला से सामने आ रही तस्वीरें कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बीते एक सप्ताह में चार गायों और मात्र चार दिन के एक नवजात बछड़े की मौत ने गौशाला की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। गौशाला प्रबंधन भले ही सफाई देने में जुटा हो, लेकिन लगातार हो रही मौतों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गौशाला में तैनात आठ-आठ सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यदि बछड़े को कुत्ते ने काटा, तो वह अंदर पहुंचा कैसे? और यदि कुत्ता नहीं पहुंचा, तो फिर बछड़े की मौत की असली वजह क्या है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
“गौशाला नहीं, गायों का लॉकअप बन गई है”
स्थानीय युवक सोनू अग्रवाल ने गौशाला की स्थिति को लेकर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गौशाला में गायों को सेवा नहीं बल्कि सजा मिल रही है। जहां गायों को खुले और सुरक्षित वातावरण में रखा जाना चाहिए, वहां उन्हें सीमित जगह में ठूंसकर रखा गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पानी के टैंकों में काई जमी हुई है, गंदगी का अंबार लगा है, पंखे वर्षों से बंद पड़े हैं और बीमार गायों के इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गौशाला में आने वाला पैसा और संसाधन खर्च कहां हो रहे हैं?
दूध देने वाली गायें वीआईपी, बाकी भगवान भरोसे!
स्थानीय लोगों का आरोप झेल है कि गौशाला में केवल दूध देने वाली गायों को ही प्राथमिकता दी जाती है। उन्हें चारा, पानी और देखभाल मिलती है, जबकि बाकी गायों की हालत दयनीय बनी हुई है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह गौसेवा की भावना के साथ खुला मजाक है।
बताया जा रहा है कि गौशाला में करीब 400 गायें थीं, लेकिन लगातार मौतों के बाद संख्या घटकर लगभग 350 रह गई है। एक सप्ताह में चार गायों की मौत किसी सामान्य घटना की तरह नहीं देखी जा सकती।
मृत गायों को दफनाया जाता है या डंपिंग यार्ड में फेंका जाता है?
मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है।
आधिकारिक तौर पर दावा किया जाता है कि मृत गायों का अंतिम संस्कार नगर निगम के माध्यम से कराया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि मृत गायों को रामपुर कचरा डंपिंग यार्ड में फेंक दिया जाता है।यदि यह सच है तो यह न सिर्फ अमानवीय है बल्कि गौसेवा के नाम पर चल रही व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
अध्यक्ष ने माना सुधार की जरूरत, लेकिन जिम्मेदार कौन?
गौशाला के अध्यक्ष अजय रतेरिया ने व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत स्वीकार की है। लेकिन सवाल यह है कि जब लगातार मौतें हो रही थीं, तब तक जिम्मेदार लोग क्या कर रहे थे? यदि व्यवस्थाएं खराब थीं तो उन्हें सुधारने की पहल पहले क्यों नहीं की गई?

अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही भी जरूरी
गौशाला में लगातार हो रही मौतें, गंदगी, पानी और इलाज की कथित कमी, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और मृत पशुओं के निस्तारण को लेकर उठे आरोप अब केवल चर्चा का विषय नहीं रह गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब सिर्फ जांच की घोषणा नहीं, बल्कि दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गौमाता की सेवा के नाम पर चल रही इस व्यवस्था में यदि वास्तव में लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोग के ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर कब तक गायें मरती रहेंगी और प्रबंधन सिर्फ सफाई देता रहेगा?
