छत्तीसगढ़ के इस जिले में संविदाकर्मियों का पुलिस पर पथराव….CSEB चेयरमैन और कलेक्टर के समझाने पर भी नहीं माने…..प्रशासन ने कोरोना का हवाला देकर…..पढ़ें आगे न्यूज़ मिर्ची-24
रायगढ़।छत्तीसगढ़ के जांजगीर में उस वक्त हालात बिगड़ गये,जब मड़वा ताप विद्युत प्लांट के संविदाकर्मियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी.. नियमितिकरण की मांग को लेकर मड़वा ताप विद्युत गृह के संविदा कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे।प्रशासन ने सभी आंदोलनकारियों से बात कर बीच का हल निकालने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी उग्र हो गये और फिर पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।दरअसल मड़वा ताप विद्युत गृह के लिए विस्थापित लोगों को 2015 पुनर्वास नीति के तहत प्लांट में संविदा नौकरी दी गयी थी। लेकिन कर्मचारी अब नियमितिकरण की मांग कर रहे थे। इनकी मांगों को लेकर CSEB के चेयरमैन ने इन्हें वार्ता के लिए भी बोला था।आज आंदोलनकारियों ने प्लांट के गेट को जाम कर दिया। कर्मचारी ना तो अंदर से बाहर आ पा रहे थे और ना ही दूसरी शिफ्ट के कर्मचारी अंदर जा पा रहे थे।कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के अध्यक्ष से बातचीत कराए जाने का आग्रह प्रशासन से किया था, इस पर प्रशासन ने चार जनवरी का समय तय किया लेकिन कर्मचारियों का कहना था कि वार्ता और जल्दी करायी जाए। इस पर प्रशासन ने तीन जनवरी की नयी तारीख तय की, आंदोलनकारी इस पर भी राजी नहीं हुए और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आज ही बातचीत कराने की जिद करने लगे। उनकी इस जिद के बावजूद प्रशासन ने सहानुभूति पुर्वक पहल करते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उनकी बात छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के अध्यक्ष से कराई। इसके बाद भी आंदोलनकारियों ने हटने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती वो नहीं हटेंगे।खुद जांजगीर कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने खुद आंदोलनकारियों से बात की और उनसे आंदोलन खत्म करने का अनुरोध किया। कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने ये भी कहा कि कोरोना के मद्देनजर इस तरह का आंदोलन करना अवैधानिक है, लेकिन आंदोलनकारी सुनने को तैयार नहीं थे। इधर आंदोलनकारियों की वजह से प्लांट के सैंकड़ो कर्मचारी अंदर फंसे थे। कुछ ऐसे भी कर्मचारी फंसे थे जो ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज थे जिन्हें वहां से निकालना जरूरी था, लिहाजा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का पुलिस का इस्तेमाल किया, जिसके बाद आंदोलनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थरबाजी से कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गये। लिहाजा पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ना पड़ा।