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रायगढ़ के कार्मल विद्यालय में विद्यार्थियों को कलावा धारण करने और तिलक लगाने से रोकने के कथित मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) रायगढ़ इकाई ने विद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ज्ञापन सौंपा है।

परिषद ने इसे विद्यार्थियों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए तत्काल प्रतिबंध हटाने की मांग की है।एबीवीपी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कलावा और तिलक केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की पहचान भी हैं। विद्यार्थियों को इन प्रतीकों को धारण करने से रोकना उनकी भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

परिषद का कहना है कि यदि कोई विद्यार्थी अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप कलावा पहनता है या तिलक लगाता है, तो उसे ऐसा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, बशर्ते इससे विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था प्रभावित न हो।ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने और उसका शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है।

परिषद का तर्क है कि विद्यालयों को विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में भी कार्य करना चाहिए।विद्यार्थियों की भावनाओं का सम्मान जरूरी:एबीवीपी परिषद ने कहा कि विद्यालय शिक्षा और संस्कार का केंद्र होता है। ऐसे में विद्यार्थियों की सांस्कृतिक एवं धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि किसी विद्यार्थी की पहचान उसकी परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ी है।

तो उसे उससे वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।एबीवीपी ने विद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों द्वारा कलावा धारण करने और तिलक लगाने पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। साथ ही विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप शालीनता के साथ उपस्थित होने की स्वतंत्रता दी जाए।

परिषद ने दी आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन में परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि विद्यार्थियों की भावनाओं और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होगी।सौहार्दपूर्ण समाधान की अपेक्षा परिषद ने प्रशासन से इस विषय में संवेदनशीलता दिखाने और सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालने की अपील की है।

संगठन का कहना है कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान हो तथा विद्यार्थियों को अपनी पहचान के साथ शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिले।इस संबंध में एबीवीपी रायगढ़ की नगर मंत्री रूचि मिश्रा के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन 19 जून 2026 को विद्यालय प्रशासन को सौंपा गया। अब इस मामले में विद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं!!
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